
Raipur: रायपुर में 10 करोड़ की लगत से बने NIT चौपाटी को हटाकर आमानाका में शिफ्ट करने के विरोध में शुरू हुआ विवाद लगातार गरमाता जा रहा है। युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा विधायक राजेश मूणत के पोस्टर पर कालिख पोतकर विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद पुलिस ने जिलाध्यक्ष समेत कई कार्यकर्ताओं पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। अब इस FIR के विरोध में यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर सरस्वती नगर थाने का घेराव कर दिया और पुलिस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई।
उच्चस्तरीय जांच समिति बनाने की मांग
सरस्वती नगर थाने के घेराव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चौपाटी विवाद की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाने की प्रमुख मांग रखी। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में कई जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है, इसलिए उन्होंने उन पर भी कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे।
विवाद की शुरुआत और पोस्टर पर कालिख पोतने का मामला
यह मामला 26 नवंबर को शुरू हुआ था, जब भाजपा की ओर से नालंदा परिसर (Nalanda Parisar) की घोषणा का होर्डिंग लगाया गया था, जिसमें विधायक राजेश मूणत की भी तस्वीर थी। एनआईटी चौपाटी को हटाने के विरोध में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इसी होर्डिंग पर लगी मूणत की तस्वीर पर कालिख पोत दी थी, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। चौपाटी की दुकानें आमानाका में शिफ्ट होने के बावजूद विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर बना हुआ है और इस कदम का पुरजोर विरोध कर रहा है।
अधिकारियों की भूमिका पर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस नेताओं ने उप-मुख्यमंत्री अरुण साव से भी मुलाकात कर 7 दिनों के भीतर जांच कमेटी गठित करने की मांग की है। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि जिन अधिकारियों ने पहले इस चौपाटी को विकसित करने की अनुमति दी थी, वही अधिकारी अब इसे अवैध बताकर जबरन हटवा रहे हैं। कांग्रेस ने अपनी प्रमुख मांगों में राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच करने और भविष्य की कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट नीति प्रकाशित करने की भी मांग शामिल की है।
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10 करोड़ की चौपाटी पर ‘नालंदा-2’ बनाने की योजना
रायपुर में इस चौपाटी के विकास पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। भाजपा सरकार आने के बाद इसे हटाकर उस जगह पर ‘नालंदा-2’ बनाने की योजना पर तेज़ी से काम शुरू हुआ। नवंबर 2025 में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई, लेकिन विवाद तब और गहरा गया जब रेलवे ने 32 दुकानदारों को नोटिस भेजकर जमीन पर अपना दावा ठोंक दिया। इस मामले को सुलझाने के लिए नगर निगम और रेलवे के बीच बातचीत जारी है।



