
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है। शुक्रवार को रायपुर की विशेष अदालत में 13 आरोपियों के खिलाफ करीब 400 पन्नों का विस्तृत चालान दाखिल किया गया। इस घोटाले में आयोग के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी मुख्य आरोपी बनाए गए हैं। चार्जशीट में उनके अलावा उद्योगपति और रसूखदार परिवारों के उन लोगों के नाम शामिल हैं जिन्हें नियमों को ताक पर रखकर सरकारी पदों पर बिठाया गया था। फिलहाल इस मामले में 12 आरोपी जेल की सलाखों के पीछे हैं जबकि एक अन्य आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
रिश्तेदारों की ‘लॉटरी’: डिप्टी कलेक्टर से लेकर DSP तक बांटे गए पद
CBI की जांच में यह साफ हुआ है कि साल 2021 की भर्ती परीक्षा में किस तरह अपनों को फायदा पहुँचाया गया। टामन सिंह सोनवानी पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने पांच करीबी रिश्तेदारों का चयन महत्वपूर्ण पदों पर करवाया। उनके बेटे नीतेश और बहू निशा कोसले को डिप्टी कलेक्टर बनाया गया। वहीं भाई की बहू को जिला आबकारी अधिकारी और बहन की बेटी को श्रम अधिकारी का पद दिया गया। इतना ही नहीं उनके बड़े भाई के बेटे साहिल सोनवानी को भी डीएसपी के पद पर चयनित किया गया था। जांच एजेंसी ने इन नियुक्तियों को लेकर पुख्ता सबूत जुटाए हैं जो बताते हैं कि मेरिट लिस्ट में भारी हेरफेर की गई थी।
उद्योगपति और नेताओं के बीच सांठगांठ: पैसों के दम पर खरीदी गई नौकरी
घोटाले की आंच सिर्फ चेयरमैन के परिवार तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसमें बड़े उद्योगपतियों के नाम भी सामने आए हैं। बजरंग पावर एंड इस्पात के तत्कालीन निदेशक श्रवण कुमार गोयल ने भी अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को डिप्टी कलेक्टर बनवाने के लिए कथित तौर पर डील की थी। सीबीआई ने चार्जशीट में इन सभी को आरोपी बनाया है। आरोप है कि योग्य उम्मीदवारों को पीछे धकेलते हुए उद्योगपतियों और कांग्रेस नेताओं के परिजनों को सिस्टम के जरिए सीधे फायदा पहुँचाया गया। इस खुलासे के बाद से प्रदेश की राजनीति में भी हड़कंप मचा हुआ है क्योंकि चयनित सूची में कई रसूखदार नाम शामिल थे।
पारदर्शिता पर लगा दाग: 171 पदों की भर्ती के लिए रची गई थी पूरी साजिश
पूरा विवाद 2021 में शुरू हुई 171 पदों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। उस वक्त प्री परीक्षा के बाद 2,565 उम्मीदवार सफल हुए थे और अंत में 170 लोगों की चयन सूची जारी की गई थी। जैसे ही लिस्ट बाहर आई उम्मीदवारों ने धांधली का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने पाया कि परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और चहेते लोगों को जिताने के लिए पूरी साजिश रची गई थी। अब कोर्ट में चालान पेश होने के बाद जल्द ही इस मामले में ट्रायल शुरू होगा जिससे दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद जगी है।
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