
छत्तीसगढ़ में सहायक प्राध्यापक भर्ती 2019 को लेकर चल रहा लंबा कानूनी विवाद आखिरकार थम गया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह वैध करार देते हुए इसके खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले से उन सैकड़ों चयनित अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है जो पिछले सात सालों से अपनी नियुक्ति और भविष्य को लेकर अधर में लटके थे। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य में उच्च शिक्षा विभाग के खाली पदों को भरने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
आरक्षण नियमों और मेरिट पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने साफ किया कि अगर आरक्षित वर्ग का कोई भी उम्मीदवार अपनी मेहनत से सामान्य श्रेणी यानी अनारक्षित वर्ग के कट-ऑफ से ज्यादा नंबर लाता है, तो उसे अनारक्षित सीट पर ही जगह मिलेगी। इससे मेरिट में आने वाले प्रतिभाशाली छात्रों के हक सुरक्षित रहेंगे। कोर्ट ने भर्ती के बीच में नियमों में किए गए संशोधनों को भी कानूनी रूप से सही माना है। न्यायाधीशों का मानना है कि प्रक्रिया के दौरान अपनाए गए तरीके संवैधानिक दायरे में ही थे।
क्या था पूरा विवाद और क्यों अटकी थी भर्ती
यह पूरा मामला मुख्य रूप से परीक्षा के बाद नियमों में बदलाव और आरक्षण लागू करने के तरीके को लेकर कोर्ट पहुंचा था। कुछ उम्मीदवारों ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि चयन प्रक्रिया के बीच में किए गए फेरबदल से कुछ वर्गों को नुकसान हो रहा है। इसके अलावा वेटिंग लिस्ट और कट-ऑफ लिस्ट को लेकर भी कई सवाल उठाए गए थे। इन विवादों की वजह से साल 2019 से शुरू हुई यह भर्ती प्रक्रिया अदालती चक्करों में फंसकर रह गई थी। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती में कोई भी अनुचित प्रावधान नहीं पाया गया है।
खुशी से झूम उठे अभ्यर्थी, सोशल मीडिया पर मनाया जश्न
अदालत का फैसला आते ही उन अभ्यर्थियों के चेहरों पर चमक लौट आई जो सालों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। कई उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशी साझा करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस लंबे संघर्ष ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया था लेकिन न्यायपालिका के इस निर्णय ने उनके करियर को नई उम्मीद दी है। चयनित शिक्षकों ने अब सरकार से मांग की है कि आदेश की कॉपी मिलते ही जॉइनिंग की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि वे कॉलेजों में अपनी सेवाएं दे सकें।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भविष्य के संकेत
बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस फैसले के जरिए शासन और भर्ती एजेंसियों को भी कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने रेखांकित किया कि सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवैधानिक नियमों का पालन सबसे ऊपर है। किसी भी स्तर पर पक्षपात या अनियमितता की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षा विभाग में खाली पड़े पदों पर नई नियुक्तियों की उम्मीद भी बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि यह फैसला भविष्य में होने वाली अन्य भर्तियों के लिए भी एक नजीर साबित होगा जिससे कानूनी अड़चनें कम होंगी।
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