
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बजट सत्र को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी मंगलवार, 24 फरवरी को राज्य का वार्षिक बजट पेश करेंगे। विष्णु देव साय सरकार के इस तीसरे बजट से प्रदेश की जनता को काफी उम्मीदें हैं। विधानसभा का सत्र आज से शुरू हो चुका है और सदन की कार्यवाही के बीच सरकार अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने वाली है। माना जा रहा है कि इस बार के बजट में न केवल लोक-लुभावन घोषणाएं होंगी, बल्कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए फंड मैनेजमेंट का एक दूरगामी प्लान भी सामने आएगा।
धान खरीदी और महतारी वंदन के बीच वित्तीय तालमेल
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती दो प्रमुख योजनाओं के लिए भारी-भरकम राशि जुटाना है। भाजपा ने चुनाव से पहले 3100 रुपये (जो अब बढ़कर 3500 रुपये के करीब है) प्रति क्विंटल में धान खरीदी और महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को 1000 रुपये मासिक देने का वादा किया था। आंकड़ों के मुताबिक, इन दोनों योजनाओं पर ही करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन वादों को पूरा करने के साथ-साथ विकास कार्यों के लिए बजट का संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए एक कठिन परीक्षा जैसा होगा।
1.80 लाख करोड़ के पार जा सकता है बजट का आकार
पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने 1.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जो उससे पिछले साल के मुकाबले 12 प्रतिशत अधिक था। इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि बजट का कुल आकार 1.80 लाख करोड़ रुपये को पार कर सकता है। बजट में इस बढ़ोतरी से संकेत मिलते हैं कि सरकार के पास नई योजनाओं और ढांचागत विकास के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध रहेगी। इसमें कृषि, युवाओं के लिए स्वरोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में नई सौगातों की उम्मीद
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार का विशेष ध्यान ‘नालंदा परिसर’ जैसी आधुनिक लाइब्रेरी और नए स्कूल-कॉलेज भवनों के निर्माण पर है। उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में प्रदेश के बड़े शहरों में नए अध्ययन केंद्रों के लिए विशेष फंड जारी किया जाएगा। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले साल 12 नए नर्सिंग कॉलेजों की घोषणा के बाद, इस बार जिला अस्पतालों के उन्नयन और नई चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर फोकस रहने वाला है। इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए नए पुलिस थानों के निर्माण का भी प्रस्ताव आ सकता है।
नगरीय निकायों का घाटा और शहरों का विकास
शहरों के विकास को लेकर सरकार एक नए मॉडल पर विचार कर रही है। वर्तमान में ज्यादातर नगर निगम घाटे में चल रहे हैं और अपनी कमाई से विकास कार्य करने में अक्षम हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में सरकार ने नगर निगमों को 50 से 100 करोड़ रुपये तक की सहायता दी थी। इस बजट में वित्त मंत्री कुछ ऐसे प्रावधान कर सकते हैं जिससे निकायों की आत्मनिर्भरता बढ़े और वे अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकें। चूंकि अभी नगरीय निकाय चुनाव में समय है, इसलिए सरकार के पास ठोस नीति बनाने का पर्याप्त अवसर है।
गुड गवर्नेंस और स्वदेशी सिद्धांत पर फोकस
ओपी चौधरी का यह बजट ‘गुड गवर्नेंस’ और तकनीकी इस्तेमाल पर आधारित रहने वाला है। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत को अपनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले कुटीर उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। कुल मिलाकर, कल पेश होने वाला बजट यह तय करेगा कि छत्तीसगढ़ अगले ढाई वर्षों में विकास की किस दिशा में आगे बढ़ेगा।



