
रायपुर। भारत की महिला क्रिकेट टीम ने 2 नवंबर 2025 को विमेंस वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। इस गौरवशाली पल के पीछे छत्तीसगढ़ की बेटी आकांक्षा सत्यवंशी का भी अहम योगदान रहा, जिन्होंने बतौर फिजियोथैरेपिस्ट खिलाड़ियों को मैदान पर पूरी तरह फिट रखने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रायपुर लौटने पर उनका स्वागत किसी उत्सव से कम नहीं था, जहाँ मरीन ड्राइव पर ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक छत्तीसगढ़ी नृत्य के साथ उनका शानदार अभिनंदन किया गया।
फूलों की वर्षा के बीच गूंजे “छत्तीसगढ़ की शान” के नारे
आकांक्षा सत्यवंशी की एक झलक पाने के लिए प्रशंसक दोपहर 12 बजे से ही मरीन ड्राइव पर जुटने लगे थे। लोगों का हुजूम उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ा।
जैसे ही आकांक्षा रायपुर पहुँचीं, भीड़ ने “छत्तीसगढ़ की शान” के नारे लगाए। फूलों की वर्षा, पटाखों की गूंज और नाचते-गाते प्रशंसकों के बीच आकांक्षा ने मुस्कुराते हुए सबका अभिवादन स्वीकार किया। इस मौके पर दक्षिण कोसल न्यूज़ से बात करते हुए आकांक्षा ने कहा, “मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। लोग इतनी देर से खड़े होकर हमारा इंतज़ार कर रहे हैं और इतना प्यार दे रहे हैं, इसके लिए मैं बेहद आभारी हूँ।” उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत और काम को जो सराहना मिली है, वह उनके लिए गर्व और सम्मान का पल है।

“टैलेंट की कमी नहीं, बस अवसर की है जरूरत”
आकांक्षा ने इस मौके पर छत्तीसगढ़ के टैलेंट की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यहाँ की बेटियों में हुनर की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच और मार्गदर्शन की जरूरत है। वर्ल्ड कप के दौरान टीम के लक्ष्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “टूर्नामेंट के दौरान हमारा लक्ष्य सिर्फ़ एक था, वर्ल्ड कप जीतना।” फिजियोथैरेपिस्ट के रूप में अपने अनुभव पर उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की फिटनेस पर लगातार नज़र रखनी पड़ती है ताकि उन्हें किसी तरह की चोट या दर्द न हो। उन्होंने बताया कि 55 दिनों तक घर से दूर रहने के बावजूद, टीम को घर जैसा माहौल देने की पूरी कोशिश की गई थी।
आगे देश और राज्य का नाम रोशन करने का लक्ष्य
आकांक्षा ने अपनी भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए कहा कि खेल जगत में काम कभी रुकता नहीं है और यही चीज़ उन्हें लगातार प्रेरित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ल्ड कप की यह जीत उनके करियर की सिर्फ़ शुरुआत है। आकांक्षा ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य देश और राज्य का नाम रोशन करने के लिए और भी बड़े मंचों पर काम करना है, जिसके लिए वह निरंतर प्रयास करती रहेंगी। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आज छत्तीसगढ़ की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

टीम इंडिया ने पहली बार जीता था वर्ल्ड कप
2 नवंबर को नवी मुंबई के डॉ डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में भारतीय महिला टीम ने साउथ अफ्रीका को 52 रनों से हराकर खिताब जीता था। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम ODI वर्ल्ड कप जीतने वाली दुनिया की चौथी टीम बन गई।



