
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। इस बार का सत्र काफी हंगामेदार रहने की उम्मीद है क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है। सत्र की शुरुआत से पहले रविवार को कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें सरकार को घेरने के मुद्दों पर चर्चा होगी। इस सत्र के दौरान कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं, जो 20 मार्च तक चलेंगी। सदन की कार्यवाही को लेकर भाजपा ने भी 23 तारीख को अपने विधायकों की बैठक बुलाई है ताकि विपक्ष के हमलों का पुरजोर जवाब दिया जा सके।
सत्र में पेश होगा धर्मांतरण विरोधी विधेयक
इस बजट सत्र की सबसे बड़ी खबर धर्मांतरण विरोधी विधेयक को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस बार सदन में आधा दर्जन से अधिक विधेयक पेश करने वाली है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण धर्मांतरण रोकने से संबंधित नया कानून हो सकता है। इसके अलावा, सदन की मेज पर एक हजार से अधिक सवाल पहले ही लग चुके हैं। विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर मंत्रियों से जवाब मांगेंगे। विधायकों की भारी सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि प्रश्नकाल के दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिलेगी।
24 फरवरी को आएगा 2 लाख करोड़ का बजट
सत्र के दूसरे दिन यानी 24 फरवरी को वित्त मंत्री ओपी चौधरी वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश करेंगे। जानकारों का अनुमान है कि इस बार राज्य का सालाना बजट 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को छू सकता है। यह सरकार का तीसरा पूर्ण बजट होगा, जिसमें महतारी वंदन योजना के अगले चरण, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और किसानों के लिए नई सुविधाओं पर खास फोकस रहने की संभावना है। सरकार का प्रयास है कि इस बजट के जरिए हर वर्ग को साधा जा सके।
विपक्ष ने तैयार किया ‘काम रोको प्रस्ताव’ का हथियार
विपक्ष के तेवरों से साफ है कि वह सरकार को आसानी से वॉकओवर देने के मूड में नहीं है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस ने कानून-व्यवस्था, नक्सल समस्या और धान खरीदी में हुई कथित देरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का मन बनाया है। चर्चा है कि विपक्ष इन संवेदनशील विषयों पर ‘काम रोको प्रस्ताव’ ला सकता है। महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर भी सदन के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
किसानों और युवाओं पर टिकी सबकी नजरें
बजट में किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता और धान के बोनस को लेकर बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं। वहीं, युवाओं को उम्मीद है कि नई शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी पदों पर नियुक्तियों के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाएंगे। राज्य की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए वित्त मंत्री बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर भी बड़ा निवेश कर सकते हैं। अब देखना होगा कि सरकार अपने पिटारे से जनता के लिए क्या नया निकालती है और विपक्ष के तीखे सवालों का सामना कैसे करती है।
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