CG Legislative Assembly Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा: बजट सत्र का 15वां दिन, प्रदूषण और किसानों की बदहाली पर विपक्ष का वार

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज 15वां दिन है। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने आक्रामक रुख अपना लिया है। आज प्रश्नकाल के दौरान आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल और कृषि एवं आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना होगा। चर्चा के मुख्य केंद्र में प्रदेश के उद्योगों से निकलने वाला खतरनाक कचरा, डोंगरगढ़ में ‘प्रसाद योजना’ के तहत हुए निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप और किसानों को समय पर खाद-बीज न मिलने की समस्याएं शामिल हैं।

उद्योगों से निकलता ‘जहरीला कचरा’: नेता प्रतिपक्ष ने मांगी रिपोर्ट

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने प्रदेश में खतरनाक अपशिष्ट (Hazardous Waste) उत्पन्न करने वाली औद्योगिक इकाइयों का मुद्दा उठाया है। उन्होंने सरकार से पूछा है कि राज्य में ऐसे कितने लघु, मध्यम और बड़े उद्योग हैं जिनसे निकलने वाला कचरा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा है। महंत ने इन उद्योगों में ‘ऑनलाइन एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम’ की स्थापना और इसके लिए खर्च की गई राशि का पूरा ब्यौरा मांगा है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों का जीवन संकट में है।

डोंगरगढ़ श्री यंत्र भवन: ‘प्रसाद योजना’ में धांधली के आरोप

विधायक श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल ने डोंगरगढ़ में “प्रसाद योजना” के तहत निर्मित श्री यंत्र भवन में अनियमितता का मामला उठाया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस भवन के निर्माण के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कितनी राशि स्वीकृत की थी और काम समय पर पूरा क्यों नहीं हुआ। बघेल ने निर्माण की गुणवत्ता और ठेकेदार की चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने विभाग से उस समिति की जानकारी मांगी है जिसकी देखरेख में यह कार्य हुआ। विपक्ष का दावा है कि इस महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन परियोजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है।

ट्रैक्टर सब्सिडी का इंतजार: फाइलों में दबे किसानों के आवेदन

विधायक इंद्र साव ने प्रदेश में कृषि यंत्रों, विशेषकर ट्रैक्टर खरीदी पर मिलने वाले अनुदान का मुद्दा उठाया है। उन्होंने जानकारी मांगी है कि जनवरी 2024 से फरवरी 2026 तक कितने किसानों ने ट्रैक्टर के लिए आवेदन किया और उनमें से कितनों को सब्सिडी मिली। आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में आवेदन अभी भी लंबित हैं। साव ने सरकार से पूछा है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत किसानों को कितनी राशि दी जाती है और आवेदनों के पेंडिंग रहने का मुख्य कारण क्या है।

खाद-बीज की किल्लत: खेती के सीजन में किसान हुए परेशान

विधायक अटल श्रीवास्तव ने राज्य में उर्वरक (खाद) और बीज की कमी को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2025-26 के दौरान कई जिलों में किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो पाया, जिससे बुआई प्रभावित हुई। उन्होंने सरकार से जिलेवार मांग और आपूर्ति के आंकड़े पेश करने को कहा है। विपक्ष का कहना है कि बीज निगम और सहकारी समितियों के कुप्रबंधन के कारण किसानों को खुले बाजार से ऊंचे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता: अजय चंद्राकर का मंत्री से सवाल

वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि पिछले तीन सालों में खरीफ और रबी फसलों के लिए बीजों की मांग कितनी थी और सरकार ने इसकी पूर्ति कैसे की। चंद्राकर ने निजी संस्थाओं और फर्मों के साथ हुए अनुबंधों और उन्हें किए गए भुगतान की दर पर भी जानकारी मांगी है। उन्होंने सरकार से पूछा कि राज्य को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौन सी नई नीतियां लागू की गई हैं और उनके परिणाम क्या रहे।

धमतरी में मत्स्य पालन: बजट के बंदरबांट की शिकायत

विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम ने धमतरी जिले में मछली पालन विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का ब्यौरा मांगा है। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2023 से अब तक कितनी राशि आवंटित की गई और विकासखंडवार कितने किसानों को इसका लाभ मिला। मरकाम ने अनुदान वितरण में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाए ताकि यह पता चल सके कि वास्तविक किसानों को मदद मिल रही है या केवल कागजों पर ही योजनाएं चल रही हैं।

सदन में आज क्या है खास?

प्रश्नकाल के बाद सदन में कई महत्वपूर्ण विभागीय प्रतिवेदन और बजट अनुदान मांगों पर चर्चा होगी। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी राज्य की आर्थिक स्थिति और निवेश को लेकर कुछ नई घोषणाएं कर सकते हैं। वहीं, रामविचार नेताम को कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास पर सफाई देनी होगी। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि यदि मंत्रियों के जवाब संतोषजनक नहीं रहे, तो वे सदन से वॉकआउट भी कर सकते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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