CG Legislative Assembly Video: जंबूरी टेंडर पर विधानसभा में संग्राम: भ्रष्टाचार के आरोपों पर विपक्ष का वॉकआउट, विधायक उमेश पटेल बोले– खास आदमी को लाभ देने के लिए बदली गईं शर्तें

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को बालोद में आयोजित स्काउट-गाइड रोवर रेंजर जंबूरी कार्यक्रम का मुद्दा गरमाया रहा। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने इस आयोजन में हुए खर्च और टेंडर प्रक्रिया में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा। विपक्ष का दावा है कि चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को जानबूझकर आसान बनाया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के जवाबों से असंतुष्ट होकर कांग्रेस विधायकों ने सदन की समिति से जांच की मांग की और अंततः विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।

टेंडर शर्तों में बदलाव पर रार: कठिन नियमों को क्यों किया गया आसान?

प्रश्नकाल के दौरान उमेश पटेल ने सवाल उठाया कि आखिर पुराना टेंडर रद्द कर नया टेंडर क्यों जारी किया गया। इस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने दलील दी कि पहले की शर्तें काफी जटिल थीं, जिससे स्थानीय लोग प्रक्रिया में भाग नहीं ले पा रहे थे। मंत्री के अनुसार, स्थानीय भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से शर्तों में बदलाव किया गया। हालांकि, विपक्ष ने इसे सिरे से खारिज करते हुए आरोप लगाया कि किसी विशेष व्यक्ति को ठेका दिलाने के लिए नियमों को ‘डाउनग्रेड’ किया गया, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

जेम पोर्टल बनाम विभागीय खरीद: आयुक्त की चिट्ठी ने खड़ा किया विवाद

सदन में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि भारत स्काउट गाइड की नेशनल बॉडी ने आयोजन के लिए 5 करोड़ रुपये मिलने के बाद जेम (GeM) पोर्टल के जरिए खरीदी की बात कही थी। उमेश पटेल ने दावा किया कि इस पर आयुक्त ने पत्र लिखकर बताया था कि जेम पोर्टल से यह खरीदी नहीं की जा सकती। मंत्री ने बचाव करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही है, लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई थी, तो आयोजन स्थल पर काम कैसे शुरू हो गया।

अध्यक्ष पद को लेकर भ्रम: कौन है असली मुखिया?

विधायक उमेश पटेल ने सदन में पूछा कि स्काउट गाइड का पदेन अध्यक्ष कौन होता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि स्कूल शिक्षा मंत्री ही इसके अध्यक्ष होते हैं। इस पर पटेल ने कटाक्ष करते हुए पूछा कि फिर एक सांसद खुद को अध्यक्ष क्यों बता रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि परिषद को भंग करने की शक्ति किसके पास है। इस पर मंत्री ने सफाई दी कि टेंडर किसी सांसद ने नहीं बल्कि जिला प्रशासन ने रद्द किए थे, जिसके बाद नई प्रक्रिया शुरू की गई।

समय सीमा पर सवाल: 10 दिन के भीतर कैसे हुआ सारा खेल?

उमेश पटेल ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि 24 दिसंबर 2025 को नया टेंडर निकाला गया और इसकी अंतिम तारीख 3 जनवरी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस छोटी सी समय सीमा के खत्म होने से पहले ही आयोजन स्थल पर काम शुरू हो चुका था। विपक्ष का आरोप है कि जब तक टेंडर आधिकारिक रूप से किसी फर्म को नहीं मिला, तब तक काम शुरू होना नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इसे एक पूर्व नियोजित भ्रष्टाचार करार दिया।

भूपेश बघेल की तीखी टिप्पणी: “लखनऊ से आई टीम ने पहले ही शुरू किया काम”

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सरकार पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने पूछा कि जब मामला कोर्ट में है, तो अध्यक्ष पद की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है। बघेल ने कहा कि टेंडर जारी होने से पहले काम शुरू करना एक गलत परंपरा है। इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि नेशनल हेडक्वार्टर की टीम लखनऊ के एक आयोजन के बाद सीधे बालोद आई थी और उन्होंने अपने हिस्से का प्रारंभिक कार्य शुरू किया था। मंत्री ने साफ कहा कि जेम पोर्टल के जरिए काम होने के कारण भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है।

करोड़ों का खर्च: अमर भारत किराया भंडार को मिला 5 करोड़ का ठेका

सदन के पटल पर जानकारी रखते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि बालोद जंबूरी के लिए टेंट, डोम, प्रकाश, ध्वनि व्यवस्था और भोजनालय जैसे कार्यों पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने बताया कि मेसर्स अमर भारत किराया भंडार को कुल 5 करोड़ 18 लाख 88 हजार 860 रुपये का टेंडर दिया गया था। सरकार ने स्पष्ट किया कि इन शर्तों को तय करने के लिए एक विधिवत समिति बनी थी और किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने की कोई शिकायत विभाग को नहीं मिली है।

जांच की मांग ठुकराई: विपक्ष ने सदन से किया किनारा

कांग्रेस ने मांग की थी कि इस पूरे मामले की जांच विधायकों की एक उच्च स्तरीय समिति से कराई जाए। जब मंत्री गजेंद्र यादव ने यह कहते हुए जांच से इनकार कर दिया कि जेम पोर्टल की प्रक्रिया में गड़बड़ी संभव नहीं है, तो विपक्ष का गुस्सा फूट पड़ा। कांग्रेस सदस्यों ने सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया और नारेबाजी करते हुए सदन की कार्यवाही से बाहर चले गए।

Also Read: नेशनल हेराल्ड विज्ञापन विवाद: छत्तीसगढ़ विधानसभा में गूंजा करोड़ों के भुगतान का मुद्दा, सीएम साय ने सदन में रखा आंकड़ों का हिसाब

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button