
Chhattisgarh High Court: बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में चल रहे बिना मान्यता वाले नर्सरी स्कूलों पर हाईकोर्ट ने तल्ख रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों और अभिभावकों के साथ बड़ा धोखा हुआ है। अदालत ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और प्रभावित बच्चों को ₹5 लाख का मुआवजा दिलाने को भी कहा है।
“पानठेले वाले भी स्कूल खोल सकते हैं?” – हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
Nursery schools without recognition: मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल शामिल थे, ने साफ कहा कि सरकार की कार्यप्रणाली बेहद लापरवाह है। चीफ जस्टिस ने तंज कसते हुए कहा – “आपके जवाब से तो लग रहा है कि पानठेला वाला भी स्कूल खोल सकता है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि नियम तब बदले जाते हैं जब किसी “मर्सिडीज वाले” को बचाना हो। शिक्षा विभाग को फटकारते हुए कोर्ट ने साफ कहा – बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
2013 से लागू हैं नियम, फिर भी 12 साल तक स्कूल कैसे चले?
Fake schools in Chhattisgarh: जनहित याचिका कांग्रेस नेता विकास तिवारी ने दाखिल की थी। याचिकाकर्ता के वकील संदीप दुबे ने अदालत में 2013 के सरकारी सर्कुलर का हवाला दिया, जिसमें नर्सरी स्कूलों के लिए मान्यता जरूरी बताई गई थी। इसके बावजूद 330 से ज्यादा स्कूल बिना किसी मान्यता के 12 साल से चल रहे हैं।
जब शिक्षा विभाग ने अपने शपथ पत्र में यह कहा कि “नर्सरी स्कूलों को मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है”, तो कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा – “जब बड़े स्कूल संचालकों पर कार्रवाई करनी पड़ी, तो आपने नियम ही बदल दिए।”
कोर्ट का आदेश – फर्जी स्कूलों पर क्रिमिनल केस, बच्चों को मुआवजा
High Court strict action: अदालत ने कहा कि जो स्कूल बच्चों और माता-पिता से धोखा कर रहे हैं, उनके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि हर प्रभावित बच्चे को ₹5 लाख का मुआवजा दिया जाए और उन्हें किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में शिफ्ट किया जाए।
चीफ जस्टिस ने तल्ख लहजे में कहा – “गली-मोहल्ले में स्कूल खोलकर लाखों कमाए और खुद मर्सिडीज में घूम रहे हैं। बच्चों को मुआवजा दिलवाइए, तो सारा पैसा निकल जाएगा।”
शिक्षा सचिव की गैरहाज़िरी पर भी कोर्ट नाराज़
School scam Chhattisgarh: सुनवाई के दौरान जब कोर्ट को बताया गया कि शिक्षा सचिव छुट्टी पर हैं, तो कोर्ट ने फिर नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस बोले – “सचिव साहब तो हमारे डर से 15 दिन की छुट्टी को 30 दिन और बढ़ा लेंगे!” कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इतने गंभीर मामले में अधिकारी की गैरहाजिरी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अब कोर्ट ने 13 अगस्त तक सचिव या संयुक्त सचिव से नया शपथ पत्र मांगा है। साथ ही सरकार से रिपोर्ट भी तलब की है कि किन स्कूलों पर कार्रवाई की गई और कितने बच्चों को मुआवजा मिला।
सरकार की नींद अब टूटी है?
छत्तीसगढ़ में सालों से बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों के खिलाफ कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी और कार्रवाई के निर्देश अब सरकार को झकझोर रहे हैं। सवाल बड़ा है – क्या अब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ रुकेगा? या फिर नियम एक बार फिर किसी मर्सिडीज वाले के लिए बदले जाएंगे?
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