CG Teacher Yuktiyuktkaran: शिक्षकों की चार सूत्रीय मांगें, 23 संगठनों ने सौंपा संयुक्त ज्ञापन, 28 मई को मंत्रालय घेराव की चेतावनी

CG Teacher Yuktiyuktkaran: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों के बीच उबाल है। एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों से जुड़ी तमाम समस्याओं और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रदेश भर के 23 शिक्षक संगठनों ने मिलकर सरकार को एक जोरदार ज्ञापन सौंपा है। इसमें चार प्रमुख मांगें उठाई गई हैं और साथ ही चेतावनी दी गई है—अगर एक हफ्ते के भीतर समाधान नहीं निकला, तो 28 मई 2025 को मंत्रालय का घेराव किया जाएगा।

युक्तियुक्तकरण पर तुरन्त ब्रेक लगाने की मांग

CG Teacher Rationalization Controversy: शिक्षक संगठनों ने सबसे पहले राज्य में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा किया है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया न केवल एकतरफा है, बल्कि पूरी तरह असंवेदनशील और नियमों के खिलाफ है।

इन संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और शिक्षा विभाग का सेटअप 2008 इस प्रक्रिया के मौजूदा स्वरूप के विरुद्ध है। एकल शिक्षक या शिक्षकविहीन स्कूलों की स्थिति को पदोन्नति या नई पदस्थापना से सुधारा जा सकता है।

इसके अलावा, स्वामी आत्मानंद स्कूलों को अतिशेष प्रक्रिया से बाहर रखना भी शिक्षकों के अनुसार भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण है। इससे न सिर्फ शिक्षकों के अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है।

क्रमोन्नत वेतनमान के लिए जनरल आदेश की दरकार

CG Yuktiyuktkaran Update: दूसरी बड़ी मांग है—श्रीमती सोना साहू केस में कोर्ट के निर्देशानुसार दी गई वेतनमान की सुविधा को सभी पात्र शिक्षकों तक पहुंचाया जाए। शिक्षक संगठनों का कहना है कि कोर्ट का यह फैसला किसी एक शिक्षक के लिए नहीं, बल्कि पूरे संवर्ग के लिए नजीर बनना चाहिए। इसलिए वेतनमान से जुड़े एरियर्स सहित सभी को समान लाभ देने के लिए शासन को सामान्य आदेश (जनरल ऑर्डर) जारी करना चाहिए।

D.Ed. शिक्षकों के लिए B.Ed. की बाध्यता हटाने की मांग

तीसरी मांग सीधे पदोन्नति से जुड़ी है। शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब D.Ed. वाले शिक्षक वर्षों से पढ़ा रहे हैं, तो व्याख्याता पद के लिए B.Ed. को क्यों अनिवार्य बनाया गया है?

उनका कहना है कि पूर्व की तरह अब भी D.Ed. प्रशिक्षित शिक्षकों को व्याख्याता बनने का मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा, प्राचार्य के 10% पदों को विभागीय परीक्षा के जरिए भरने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

सेवा गणना नियुक्ति तिथि से हो, पेंशन व अन्य लाभ मिलें

चौथी और आखिरी मांग सेवा गणना को लेकर है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब कोई शिक्षक 10-15 साल से काम कर रहा है, तो उसकी सेवा की गिनती संविलियन की तारीख से क्यों हो रही है?

वे चाहते हैं कि सेवा की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से हो और पेंशन, ग्रेच्युटी जैसे सभी लाभ उसी आधार पर दिए जाएं।

शासन को चेतावनी, “समाधान नहीं तो घेराव तय”

ज्ञापन में शिक्षक संगठनों ने साफ तौर पर लिखा है कि अगर इन चार मांगों पर सरकार ने सात दिनों के भीतर कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो 28 मई को मंत्रालय का घेराव किया जाएगा। इसके लिए पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

ये संगठन हैं एकजुट

ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में कई बड़े और प्रभावशाली शिक्षक संगठनों के नाम शामिल हैं। इनमें शामिल हैं:

  • केदार जैन (संयुक्त शिक्षक संघ)
  • मनीष मिश्रा (समग्र शिक्षक फेडरेशन)
  • संजय शर्मा (छत्तीसगढ़ टीचर एसोसिएशन)
  • वीरेंद्र दुबे (शालेय शिक्षक संघ)
  • कृष्ण कुमार नवरंग (गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन)
  • विकास सिंह राजपूत (नवीन शिक्षक संघ)
  • शंकर साहू (शासकीय शिक्षक फेडरेशन)
  • भूपेंद्र सिंह बनाफर (सर्व शिक्षक कल्याण संघ)
  • अनिल टोप्पो (राज्य स्तरीय शिक्षक संघ)
  • और कई अन्य संगठन जिन्होंने इस मुद्दे को मिलकर उठाया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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