
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन आज मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान एपीएल (APL) राशन कार्ड से बीपीएल (BPL) राशन कार्ड में किए गए परिवर्तनों को लेकर जोरदार बहस हुई। भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने यह मुद्दा उठाते हुए अपनी ही सरकार को घेरा और कहा कि सरकार ने परिवर्तन से इनकार किया है, जबकि बिलासपुर जिले में इसी संबंध में FIR दर्ज कराई गई है। विधायक शुक्ला ने मंत्री पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया और कहा कि यदि इस तरह बिना पारदर्शिता के बदलाव होगा, तो इससे वास्तविक जरूरतमंदों के हक पर असर पड़ेगा।
मंत्री का जवाब: परिवर्तन नहीं, 19 कार्डों में गड़बड़ी की हुई थी जांच
सरकार की ओर से खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने सदन को बताया कि एपीएल से बीपीएल राशन कार्ड में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि कुल 19 राशन कार्डों में गड़बड़ी की बात सामने आई थी और इसकी जांच की गई थी। मंत्री के अनुसार, जांच में पाया गया कि 15 मामलों में हितग्राहियों की सहमति ली गई थी, जबकि 4 राशन कार्ड जोन क्रमांक 4 के जोन कमिश्नर की अनुशंसा पर कार्रवाई के बाद बनाए गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की गई है।
अजय चंद्राकर ने आधे घंटे की चर्चा और जांच की मांग की
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि इतना बड़ा विरोधाभास है, इसलिए इस मामले पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने राशन कार्ड सिस्टम में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ की जरूरत बताते हुए कल इस पर आधे घंटे की चर्चा रखे जाने की मांग की। विधायक धरमलाल कौशिक ने भी कहा कि जो अधिकारी मंत्री से गलत जवाब दिलवा रहे हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।
अन्य विधायकों ने हाई पॉवर कमिटी से जांच की मांग उठाई
High-Level Committee: इस गंभीर मामले पर अन्य वरिष्ठ विधायक भी पक्ष-विपक्ष से सामने आए। विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि यह गंभीर मामला है और इसकी जांच विधानसभा कमिटी या हाई पॉवर कमिटी से कराना चाहिए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने अजय चंद्राकर की आधे घंटे की चर्चा की मांग का भी समर्थन किया। सुशांत शुक्ला ने पुनः जोर देते हुए कहा कि यह मामला सिर्फ कुछ कार्डों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था से जुड़ा है।
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राशन कार्ड वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार का लक्ष्य
भले ही सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही सवाल उठाए हों, लेकिन यह तय है कि राशन कार्ड वितरण में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। विपक्ष द्वारा लगाए गए अनियमितताओं के आरोपों के बीच सरकार को अब इस मामले की जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।



