CGPSC घोटाला: CBI ने पेश किया 2000 पन्नों का पूरक चालान, पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ‘मास्टरमाइंड’ घोषित

रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती परीक्षा 2021 में हुए कथित CGPSC घोटाला की जाँच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाया है। सीबीआई ने विशेष अदालत में लगभग दो हजार पन्नों का अपना पहला सप्लीमेंट्री (पूरक) चालान दाखिल किया है। इस चालान में सीबीआई ने आयोग के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है।

पद का दुरुपयोग कर की गई धांधली

सीबीआई ने अपने पूरक चालान में स्पष्ट किया है कि टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने न केवल परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों और प्रभावशाली लोगों के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। चालान में यह बताया गया है कि प्रश्नपत्रों की हेराफेरी से लेकर फर्जी मेरिट सूची तैयार करने तक कई स्तरों पर भ्रष्टाचार किया गया था।

घोटाले में शामिल प्रमुख नाम

इस घोटाले में अब तक दर्जन भर से ज्यादा लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी और सोनवानी के परिजन शामिल हैं। सीबीआई ने चालान में इन सभी की गंभीर संलिप्तता का खुलासा किया है।

चालान में शामिल प्रमुख आरोपी:

  • टामन सिंह सोनवानी: (पूर्व चेयरमैन, घोषित मास्टरमाइंड)
  • जीवन किशोर ध्रुव (पूर्व सचिव एवं पूर्व आईएएस) और उनके बेटे सुमित ध्रुव
  • आरती वासनिक (पूर्व परीक्षा नियंत्रक)
  • निशा कोसले और दीपा आदिल
  • श्री बजरंग पॉवर के पूर्व डायरेक्टर एस के गोयल, उनके पुत्र शशांक गोयल, बहू भूमिका गोयल
  • ललित गणवीर (तत्कालीन डिप्टी परीक्षा नियंत्रक)
  • नितेश सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष का भतीजा)
  • साहिल सोनवानी (डिप्टी एसपी पद के लिए चयनित)

वर्तमान में ये सभी आरोपी न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद हैं। पूरक चालान दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

क्या है CGPSC घोटाला?

सीजीपीएससी घोटाला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों में योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा की गई और प्रभावशाली राजनेताओं तथा वरिष्ठ अधिकारियों के करीबियों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य उच्च पदों पर चयनित किया गया। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई थी। इस घोटाले ने प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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