
रायपुर: CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग CGPSC घोटाला मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने इस घोटाले से जुड़े चार आरोपियों को जमानत दे दी है। जमानत पाने वालों में CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के बेटे साहिल सोनवानी और नितेश सोनवानी के साथ-साथ बजरंग स्पात कंपनी के निदेशक के पुत्र शशांक गोयल और भूमिका कटियार शामिल हैं।
वरिष्ठ वकीलों ने की आरोपियों की पैरवी
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों की ओर से देश के जाने-माने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा, सिद्धार्थ अग्रवाल और शशांक मिश्रा ने पैरवी की। याचिकाकर्ताओं की दलीलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत का यह फैसला दिया।
क्या है CGPSC घोटाला?
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और अनियमितताओं से जुड़ा है। जाँच एजेंसियों के अनुसार, आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, आरती वासनिक, ललित गणवीर समेत कई अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया।
- आरोप: इन अधिकारियों पर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कर अपने रिश्तेदारों और परिचितों को अनुचित तरीके से पास कराने का आरोप है।
- परिणाम: इन धांधली से चयनित कई उम्मीदवार बाद में डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किए गए थे।
भतीजों को लाभ पहुँचाने के लिए बदले गए थे नियम
सीबीआई (CBI) ने अपनी जाँच में यह भी आरोप लगाया था कि पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने भतीजों को लाभ पहुँचाने के लिए नियमों में जानबूझकर बदलाव किया था। आरोप है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के नियमों में ‘रिश्तेदार’ शब्द को ‘परिवार’ से बदल दिया था, ताकि अपने संबंधियों के चयन का रास्ता आसान हो सके।
राज्य सरकार ने मामला CBI को सौंपा
राज्य सरकार ने इस CGPSC घोटाले की गंभीरता को देखते हुए फरवरी 2024 में यह मामला जाँच के लिए सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने इससे पहले जुलाई 2023 में 2020 से 2022 के बीच हुई CGPSC परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों की जाँच शुरू की थी।



