
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। जेल के बाहर नजारा बेहद भावुक था, जब खुद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कार चलाकर अपने बेटे को रिसीव करने पहुंचे। जेल की दहलीज से बाहर निकलते ही चैतन्य बघेल ने कहा कि आज उनके बेटे का जन्मदिन है और इस खास मौके पर परिवार से मिलना उनके लिए किसी भी अन्य खुशी से बढ़कर है। 18 जुलाई से सलाखों के पीछे रहे चैतन्य का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी और नारों के साथ जोरदार स्वागत किया।
सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं: भूपेश बघेल ने रिहाई को बताया भाजपा के ‘षड्यंत्र’ की हार
बेटे की रिहाई पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा कि चैतन्य की गिरफ्तारी एक राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा थी, जिसे आज अदालत के फैसले ने उजागर कर दिया है। बघेल ने कहा कि गांधी, कबीर और गुरु घासीदास के बताए सत्य के मार्ग पर चलने की वजह से ही आज न्याय मिला है। उन्होंने इसे सत्य की जीत करार देते हुए कहा कि एजेंसियां और भाजपा की सरकारें चाहे जितना दुरुपयोग कर लें, लेकिन सत्य को पराजित नहीं किया जा सकता। कार्यकर्ताओं के प्रेम और उत्साह को उन्होंने कांग्रेस की एकजुटता का प्रमाण बताया।
जेल के भीतर बिताए अनुभव: चैतन्य बोले- ‘कठिन समय में किताबों ने दी प्रेरणा और संघर्ष की शक्ति’
रिहाई के बाद चैतन्य बघेल ने जेल के भीतर बिताए अपने समय के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि इतने महीनों तक जेल में रहकर उन्होंने कई महत्वपूर्ण किताबें पढ़ीं, जिससे उन्हें जीवन के प्रति एक नया नजरिया मिला है।
चैतन्य के मुताबिक, जेल के एकांत ने उन्हें संघर्ष करने और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की प्रेरणा दी है। उन्होंने इसे सीखने का एक दौर बताया और कहा कि वे अब पूरी ताकत के साथ अपने परिवार और समाज के बीच वापस लौट रहे हैं।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: डीजीपी को लगाई फटकार, जांच एजेंसियों की भूमिका पर उठाए सवाल
इस मामले में जमानत देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को सख्त फटकार लगाई है। कोर्ट ने जांच की प्रक्रिया में हुई खामियों को कानून का गंभीर उल्लंघन माना है। जस्टिस ने निर्देश दिए हैं कि डीजीपी व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करें ताकि भविष्य में किसी भी आरोपी के अधिकारों का हनन न हो या जांच में किसी तरह की ढील न मिले। अदालत की इस टिप्पणी ने प्रदेश की जांच एजेंसियों और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे बचाव पक्ष अपनी बड़ी नैतिक जीत मान रहा है।
करोड़ों के घोटाले का आरोप: ईडी और एसीबी की रडार पर अब भी बना है शराब सिंडिकेट
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने साल 2019 से 2022 के बीच राज्य में 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले का दावा किया है। केंद्रीय एजेंसियों का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट के मुख्य संरक्षकों में से एक थे और उन्होंने लगभग 1,000 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन को संभाला था। वहीं एसीबी ने उनके पास 200 से 250 करोड़ रुपये का हिस्सा पहुंचने का दावा किया है। हालांकि, चैतन्य को फिलहाल जमानत मिल गई है, लेकिन मामले की मुख्य जांच और अदालती ट्रायल अभी जारी रहेगा।



