शराब घोटाला केस: चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से मिली राहत, आज दोपहर जेल से होगी रिहाई

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी कानूनी राहत मिली है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के दोनों मामलों में जमानत याचिका मंजूर कर ली है। चैतन्य पिछले साल 18 जुलाई से रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद थे। लंबी सुनवाई और फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद, अदालत ने आज उनकी रिहाई का रास्ता साफ कर दिया है। आज दोपहर तक कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे जेल से बाहर आ जाएंगे, जिससे बघेल परिवार और कांग्रेस समर्थकों में खुशी की लहर है।

अदालत की सख्त टिप्पणी: जांच एजेंसियों की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने इस बात पर सवाल उठाए कि जिस सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान को आधार बनाकर कार्रवाई की गई, उसके खिलाफ वारंट होने के बावजूद उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे कानून का “चुनिंदा इस्तेमाल” करार देते हुए कहा कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि किसी खास आरोपी को संरक्षण देना और दूसरे पर कार्रवाई करना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

DGP को फटकार: व्यक्तिगत निगरानी और निष्पक्ष जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इसे कानून का उल्लंघन मानते हुए निर्देश दिया कि डीजीपी खुद इस पूरे प्रकरण की निगरानी करें। अदालत ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में किसी भी आरोपी को इस तरह की “विशेष ढील” न दी जाए और कानून का पालन समान रूप से किया जाए। जांच में पारदर्शिता की कमी को लेकर कोर्ट का यह रुख राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है पूरा विवाद: 1000 करोड़ के लेन-देन और सिंडिकेट का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने दावा किया है कि 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ में एक संगठित शराब सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि चैतन्य बघेल इस पूरे खेल के प्रमुख संरक्षकों में से एक थे और उन्होंने लगभग 1,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन को संभाला। एजेंसियों के मुताबिक, कुल 3,200 करोड़ रुपये के इस घोटाले में चैतन्य के हिस्से में 200 से 250 करोड़ रुपये आए थे। हालांकि, बचाव पक्ष ने इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखा।

Also Read: VIDEO: भूपेश बघेल के ‘बेंदरा’ वाले बयान पर बवाल: डिप्टी सीएम अरुण साव के अपमान से भड़का साहू समाज, अल्टीमेटम दे कहा- 10 दिन में माफी मांगें

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button