
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3 हजार करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार को रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद कागजी कार्रवाई पूरी हुई और शाम को उनकी रिहाई मुमकिन हो सकी। जेल के बाहर सुबह से ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटा था। जैसे ही चैतन्य बाहर आए, समर्थकों ने उन्हें कांधे पर उठा लिया और जमकर नारेबाजी की। खुद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने बेटे को लेने जेल पहुंचे थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने तीखा हमला बोला और कहा कि उनके बेटे को एक भगोड़े और वारंटी की गवाही पर जेल भेजा गया था। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को भाजपा का राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया।
3 लाख की जमानत और 3 गवाह: वकील का दावा- ‘दस्तावेजों में नहीं मिला सीधा इंवॉल्वमेंट’
अदालत ने चैतन्य बघेल को जमानत देने के लिए कड़ी शर्तें रखी थीं। उनकी रिहाई के लिए 3 लाख रुपये का बॉन्ड और तीन जमानतदार पेश किए गए। चैतन्य के वकील सलीम रिजवी ने कोर्ट में दलील दी थी कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ईओडब्ल्यू (EOW) ने अब तक जो भी दस्तावेज पेश किए हैं, उनमें चैतन्य की किसी भी तरह की सीधी संलिप्तता नजर नहीं आती। बचाव पक्ष का कहना है कि इसी आधार पर कोर्ट ने उन्हें राहत दी है। कानून के जानकारों का मानना है कि चैतन्य को मिली यह जमानत अब इस केस में जेल में बंद अन्य आरोपियों के लिए भी एक मजबूत आधार बनेगी, जिससे आने वाले दिनों में और भी रिहाइयां हो सकती हैं।
अब कवासी लखमा की बारी: 15 जनवरी को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई, आबकारी मंत्री के खेमे में जगी उम्मीद
चैतन्य बघेल की रिहाई के बाद अब सबकी नजरें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पर टिक गई हैं। लखमा भी इसी शराब घोटाले के आरोप में जेल में बंद हैं। उनकी जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 15 जनवरी को हाईकोर्ट में होनी है। पिछली सुनवाई के दौरान ईडी ने जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा था। लखमा के वकील को उम्मीद है कि जिस ग्राउंड पर चैतन्य को राहत मिली है, उसी के आधार पर पूर्व मंत्री की भी घर वापसी हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर 15 तारीख को लखमा के पक्ष में फैसला आता है, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ी राहत होगी।
भाजपा का पलटवार: ‘जमानत मिली है बरी नहीं हुए’, लखमा को मोहरा बनाने का लगाया आरोप
चैतन्य बघेल की रिहाई पर मचे जश्न के बीच भारतीय जनता पार्टी ने तंज कसा है। बीजेपी प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि चैतन्य को सिर्फ जमानत मिली है, वे आरोपों से बरी नहीं हुए हैं। उन्होंने ‘सत्यमेव जयते’ के नारों पर निशाना साधते हुए कहा कि असल में कांग्रेस ने एक सीधे-साधे आदिवासी नेता कवासी लखमा को भ्रष्टाचार के खेल में मोहरा बनाया है। बीजेपी का कहना है कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और आने वाले समय में घोटाले की पूरी परतें खुलेंगी। फिलहाल, इस रिहाई ने राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू कर दिया है।



