
छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम में कुंभ मेले के शुरू होने से पहले ही हंगामा खड़ा हो गया है। धमतरी जिले के छोटे व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि उनसे मेले में दुकान लगाने के नाम पर मनमाना और अवैध शुल्क वसूला जा रहा है। विरोध जताते हुए बड़ी संख्या में लोग लोमस ऋषि आश्रम के पास धरने पर बैठ गए। व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन की यह मनमानी छोटे कारोबारियों की कमर तोड़ रही है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से बढ़ा विवाद
हंगामे की एक बड़ी वजह जनप्रतिनिधियों की अनदेखी भी बताई जा रही है। जनपद पंचायत क्षेत्र के सदस्यों का आरोप है कि इतने बड़े आयोजन की रूपरेखा और कार्यक्रमों से उन्हें पूरी तरह दूर रखा गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल व्यापार का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय जनभावनाओं के अपमान का मुद्दा है। उनका तर्क है कि गरियाबंद जिला प्रशासन धमतरी जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों और प्रतिनिधियों को वह महत्व नहीं दे रहा है, जिसके वे हकदार हैं।
कुलेश्वर महादेव के दर्शन में आ रही बाधा
प्रदर्शन में शामिल वरिष्ठ भाजपा नेता श्याम साहू और वीरेंद्र साहू ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि धमतरी जिले की सीमा में प्रसिद्ध कुलेश्वर नाथ महादेव का मंदिर स्थित है, लेकिन यहां के स्थानीय नागरिकों को ही दर्शन करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा और व्यवस्था के नाम पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण आम श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है, जिससे गुस्सा और बढ़ गया है।
गरियाबंद प्रशासन की मनमानी पर हंगामा
वरिष्ठ नेताओं ने गरियाबंद जिला प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक यह जन आंदोलन थमेगा नहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राजिम मेला सालों से आपसी समन्वय से चलता आया है, लेकिन इस बार फुटकर व्यापारियों को परेशान करना और बाहरी लोगों को तरजीह देना गलत परंपरा की शुरुआत है।
SDM के आश्वासन पर शांत हुआ प्रदर्शन
हंगामे की खबर मिलते ही स्थानीय एसडीएम दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने धरने पर बैठे भाजपा नेताओं और छोटे व्यापारियों से लंबी चर्चा की। अधिकारियों ने अवैध वसूली की शिकायतों की जांच करने और दर्शन की व्यवस्था को सुगम बनाने का आश्वासन दिया। साथ ही जनप्रतिनिधियों को आयोजन से जोड़ने की बात भी कही गई। प्रशासनिक भरोसे के बाद नाराज लोगों ने फिलहाल अपना धरना समाप्त कर दिया है, लेकिन प्रशासन को जल्द कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।



