
Chhattisgarh High Court Big Ruling: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने देह व्यापार के आरोप से जुड़े एक पुराने और चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन महिलाओं को बरी करने के निचले अदालत के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि कोई वयस्क व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से इस कार्य में शामिल है, तो केवल इस आधार पर अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 के तहत उसे अपराधी नहीं माना जा सकता। इस फैसले के बाद राज्य शासन की अपील खारिज कर दी गई है।
साल 2014 के कोरबा ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
Bilaspur High Court Immoral Traffic Act: यह पूरा मामला वर्ष 2014 का है, जब कोरबा जिले के एक स्थानीय न्यायालय ने तीन महिलाओं को दो-दो साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में कोरबा के ही अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 28 अगस्त 2014 को इन महिलाओं को धारा 4 के आरोपों से मुक्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर हाल ही में सुनवाई पूरी हुई।
वर्ष 2013 में महाराणा प्रताप नगर में पुलिस ने दी थी दबिश
Korba S@ex Trade Case High Court Update: मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, 11 जुलाई 2013 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि महाराणा प्रताप नगर के एक मकान में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। पुलिस ने मौके पर छापा मारकर नौ आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इनमें से तीन महिलाओं पर धारा 6 और 7 के तहत आरोप तय किए गए थे, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने अन्य धाराओं में राहत देते हुए उन्हें धारा 4 के तहत दोषी ठहराया था, जिसे बाद में सत्र न्यायालय ने पलट दिया था।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 4 के लिए दूसरी कमाई पर निर्भरता जरूरी है
HC Verdict On S@ex Work Chhattisgarh: मामले की सुनवाई करने वाली जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 4 का दायरा स्पष्ट है। इस धारा के अंतर्गत अपराध साबित करने के लिए यह साबित होना आवश्यक है कि आरोपी व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के देह व्यापार से होने वाली कमाई पर जीवित था या उसकी कमाई का उपयोग कर रहा था। चूंकि इन महिलाओं पर किसी अन्य की कमाई लेने या दलाली करने का कोई आरोप नहीं था, इसलिए यह धारा लागू नहीं होती।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देकर महिलाओं को दी गई राहत
Supreme Court And Chhattisgarh HC Ruling: अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न पुराने फैसलों का हवाला देते हुए दो टूक कहा कि अपनी इच्छा से देह व्यापार में शामिल होना कानूनन इस विशेष धारा के दायरे में अपराध नहीं माना गया है। अदालत ने कहा कि महिलाओं को केवल इस आधार पर दंडित या प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि किसी तीसरे पक्ष के शोषण या कमाई के सबूत न मिलें। इस प्रकार हाईकोर्ट ने राज्य शासन की याचिका को खारिज करते हुए महिलाओं की रिहाई का फैसला सुरक्षित रखा।



