
छत्तीसगढ़ में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए आबकारी विभाग ने अपनी कमर कस ली है। विभाग की सचिव आर. शंगीता की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में कलेक्टरों, एसपी और आईजी के साथ नई नीति के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति, दुकानों के सुचारू संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुल 25 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है। इसमें ‘रेडी टू ड्रिंक’ को कैन में बेचने और मदिराविहीन क्षेत्रों में नई दुकानें खोलने जैसे बड़े फैसले शामिल हैं।
आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक के 25 प्रमुख बिंदु
बैठक में लिए गए निर्णयों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है:
- नीति का अनुमोदन: 21 जनवरी 2026 के मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार आगामी वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति को आधिकारिक मंजूरी दी गई।
- राजस्व लक्ष्य (2025-26): वर्तमान वर्ष में जनवरी तक 8,794 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का 88% है।
- नया राजस्व लक्ष्य (2026-27): आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभाग ने 13,000 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
- दुकान संचालन के निर्देश: कलेक्टरों को दुकानों और बार के सुचारू संचालन हेतु पूर्व में जारी शासनादेशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया।
- दुकानों का समय: वर्ष 2026-27 में भी शराब दुकानों के खुलने और बंद होने का समय सुबह 10:00 से रात्रि 10:00 बजे तक यथावत रहेगा।
- 32 नई दुकानें: राज्य शासन ने 32 नई मदिरा दुकानें खोलने की अनुमति दी है, जिसके लिए कलेक्टरों से विधिवत प्रस्ताव मांगे गए हैं।
- दूरी का पालन: सभी दुकानें शैक्षणिक संस्थाओं, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों से न्यूनतम 100 मीटर की दूरी पर होना अनिवार्य है।
- अहाता जांच: प्रदेश के 360 सक्रिय अहातों की जांच कर 15 मार्च तक प्रमाण-पत्र सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
- चखना दुकानों पर कार्रवाई: अहातों के आसपास संचालित अवैध चखना केंद्रों और गुमठियों पर पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी।
- अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) फीस: फुटकर बिक्री के लिए लाइसेंस फीस ₹10,000 और कंपोजिट दुकानों के लिए ₹20,000 तय की गई है।
- बिक्री की सीमा: एक व्यक्ति एक बार में अधिकतम 4 मैगनम, 6 क्वार्ट, 12 अद्धा या 24 पाव बोतल ही खरीद सकेगा।
- कैन में शराब: ‘रेडी टू ड्रिंक’ (RTD) पेय अब कांच की बोतल के साथ-साथ कैन (Can) में भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
- देशी मदिरा के ब्रांड: देशी शराब अब यूनिक, रोमिया, शोले और सवा शेरा जैसे चार विशिष्ट लेबलों के साथ बेची जाएगी।
- ड्यूटी दर: देशी मदिरा (मसाला/प्लेन) के लिए ₹435 प्रति प्रूफ लीटर की ड्यूटी दर निर्धारित की गई है।
- अधोसंरचना शुल्क: विकास कार्यों के लिए मदिरा पर लगने वाला ‘अधोसंरचना विकास शुल्क’ आगामी वर्ष भी जारी रहेगा।
- पूर्णतः बोतलबंद आपूर्ति: नई नीति के तहत देशी मदिरा की आपूर्ति अब पूरी तरह से बोतलों में की जाएगी।
- पुलिस-आबकारी समन्वय: छापेमारी (रेड) के दौरान स्थानीय पुलिस बल और आबकारी दल के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान अनिवार्य होगा।
- भंडारण व्यवस्था: प्रदेश में संचालित 12 देशी मदिरा गोदामों और 3 प्रमुख विदेशी मदिरा भंडारण केंद्रों (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर) की समीक्षा की गई।
- कर्मचारी चयन: मैनपावर एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि ब्लैकलिस्टेड कर्मचारियों की नियुक्ति न की जाए; सूची वेबसाइट पर उपलब्ध है।
- वेतन और पारिश्रमिक: सेल्समैन, सुपरवाइजर और गार्ड्स के मासिक वेतन ढांचे के संबंध में जिलों को स्पष्ट जानकारी दी गई।
- पुलिस वेरिफिकेशन: सभी कार्यरत कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन 01 अप्रैल 2026 से पहले पूर्ण करना अनिवार्य है।
- बार नीति में संशोधन: एफ.एल. श्रेणियों के बार लाइसेंस फीस में कमी की गई है और होटलों के लिए नियमों को सरल बनाया गया है।
- रात्रि पेट्रोलिंग: ‘डायल 112’ के माध्यम से संवेदनशील दुकानों के पास रात्रि गश्त बढ़ाने और सुरक्षा गार्डों की उपस्थिति जांचने के निर्देश दिए गए।
- नकद संग्रहण (Cash Collection): यदि कैश एजेंसी उसी दिन पैसा नहीं ले जाती, तो सुरक्षा के लिहाज से राशि संबंधित थाने में जमा करानी होगी।
- महिला होमगार्ड: आबकारी रेड की कार्रवाई के दौरान महिला होमगार्ड कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।
शराब खरीदने की निर्धारित सीमा (प्रति व्यक्ति)
बैठक में तय की गई विक्रय सीमा का विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
| मदिरा का प्रकार | अधिकतम बोतल (एक बार में) |
| मैगनम (1000 ML) | 04 बोतल |
| क्वार्ट (750 ML) | 06 बोतल |
| अद्धा (375 ML) | 12 बोतल |
| पाव (180 ML) | 24 बोतल |
अधिकारियों के विशेष सुझाव
- आईजी बिलासपुर: अवैध शराब रोकने के लिए ‘कोचिया लाइसेंस’ पर विचार करने और नई दुकान चयन में राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम बनाने का सुझाव दिया।
- एसपी रायपुर ग्रामीण: होली जैसे त्योहारों पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर ‘शुष्क दिवस’ घोषित करने की सलाह दी।



