
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आंगनबाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। शहर में प्रदेश का पहला सर्वसुविधायुक्त ‘महतारी सदन सह आंगनबाड़ी’ बनकर पूरी तरह तैयार है। लगभग 85 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह केंद्र 4500 वर्ग फीट के विशाल क्षेत्र में फैला है। यह नया ढांचा सरकारी केंद्रों की पुरानी छवि को बदलकर अब किसी बड़े निजी प्ले-स्कूल जैसा नजर आता है। प्रशासन का उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को वह माहौल देना है जो अब तक केवल महंगे निजी स्कूलों में ही मिलता था।
डिजिटल क्लासरूम और आधुनिक सुविधाएं
शहीद भगत सिंह वार्ड में निर्मित इस भवन को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। महतारी सदन में बच्चों की पढ़ाई के लिए डिजिटल क्लासरूम, भोजन के लिए अत्याधुनिक डाइनिंग एरिया और साफ-सुथरा किचन बनाया गया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे परिसर में मजबूत बाउंड्रीवाल का निर्माण किया गया है। सबसे खास बात यह है कि संवेदनशीलता दिखाते हुए इस पूरे भवन को दिव्यांग अनुकूल बनाया गया है, जिसमें विशेष तौर पर उनके लिए अलग से वाशरूम और रैंप की व्यवस्था की गई है।
खेल-कूद के लिए शानदार व्यवस्थाएं
विधायक की विशेष पहल पर यहां बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विश्वस्तरीय प्रबंध किए गए हैं। मनोरंजन के साथ सीखने की प्रक्रिया को जोड़ने के लिए यहां बास्केटबॉल, स्विंग, शतरंज और कैरम जैसे खेलों की सुविधा दी गई है। बच्चों के लिए फिसल पट्टी और पिट-बॉल जैसे खेल आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगे। विधायक का संकल्प है कि सरकारी व्यवस्थाओं पर आम जनता का भरोसा इतना मजबूत हो जाए कि लोग अपने बच्चों को गर्व के साथ यहां भेजें।
रायपुर पश्चिम में बिछेगा हाई-टेक केंद्रों का जाल
यह केवल शुरुआत है क्योंकि रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में ऐसे ही चार और हाई-टेक केंद्र लोकार्पण के लिए लगभग तैयार हैं। आने वाले कुछ ही दिनों में तीन अन्य अत्याधुनिक केंद्रों का उद्घाटन किया जाएगा। विकास की इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए डीडी नगर में 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाले एक नए उद्यान का भूमि पूजन भी कल सुबह 10 बजे तय किया गया है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र की बुनियादी संरचना में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
आंकड़ों में ‘महतारी सदन’ का स्वरूप
इस पूरी परियोजना को एक निश्चित मास्टर प्लानिंग के तहत पूरा किया गया है ताकि इसे एक मॉडल के रूप में पेश किया जा सके। 85 लाख रुपये की लागत और 4500 स्क्वायर फुट के विस्तार वाला यह केंद्र न केवल एक पोषण केंद्र होगा, बल्कि यह बच्चों के सर्वांगीण विकास का ‘ग्रोथ सेंटर’ भी बनेगा। इसके जरिए स्थानीय स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य के मानकों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि सरकारी भवनों की उपयोगिता को अधिकतम स्तर तक बढ़ाया जा सके।



