
कबीरधाम जिले के मुख्यालय कवर्धा में देह व्यापार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब यह शहर की छवि के लिए बड़ा खतरा बन गया है। कवर्धा की गलियों से शुरू हुआ यह काला धंधा अब शहर के नामी लॉज, होटलों और यहां तक कि रिहायशी मकानों तक फैल चुका है। आलम यह है कि कई प्रतिष्ठान अब यात्रियों के ठहरने के लिए नहीं बल्कि घंटे के हिसाब से जिस्मफरोशी के लिए संचालित हो रहे हैं। यह एक ऐसा खुला रहस्य है जिसकी चर्चा हर तरफ है लेकिन इस पर लगाम लगाने की कोशिशें अब तक नाकाफी साबित हुई हैं।
VIP रोड से बायपास तक संदिग्ध आवाजाही
शहर के बस स्टैंड, ठाकुरदेव चौक, साधना नगर और राजनांदगांव-रायपुर बायपास जैसे प्रमुख इलाके इस धंधे के मुख्य केंद्र बन गए हैं। इन रास्तों पर दिन भर युवक-युवतियों की संदिग्ध आवाजाही देखी जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ लॉज में पहचान पत्र की अनिवार्यता को ताक पर रख दिया गया है। अक्सर केवल लड़कों की आईडी ली जाती है और लड़कियों की पहचान छिपाकर उन्हें प्रवेश दिया जाता है। 500 रुपये प्रति घंटे से शुरू होने वाले ये कमरे चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि यहां नैतिकता नहीं बल्कि दलालों का राज चलता है।
जनवरी में हुई पुलिस की पहली बड़ी कार्रवाई
बीते कुछ हफ्तों में पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी है जिससे इस नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुई हैं। 7 जनवरी की रात पुलिस ने घुघरी रोड टर्मिनल के पास एक मकान पर छापा मारा था। वहां से एक दलाल और तीन युवतियों को हिरासत में लिया गया था। हालांकि इस मामले में सबसे बड़ी चिंता यह रही कि मुख्य संचालिका पुलिस के हाथ नहीं लग पाई। इस घटना ने साफ कर दिया कि शहर के भीतर ही कई गुप्त अड्डे चल रहे हैं जिन्हें रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है।
रिहायशी इलाकों में भी फैला जिस्मफरोशी का नेटवर्क
पुलिस की दूसरी बड़ी कार्रवाई 14 जनवरी को तुलसी पारा इलाके में हुई। वहां एक महिला सरस्वती साहू के घर की तलाशी ली गई। पूछताछ में महिला ने कबूल किया कि वह पैसों के लालच में न केवल कमरे किराए पर देती थी बल्कि लड़कियां भी उपलब्ध कराती थी। इसी तरह मजगांव क्षेत्र में अमिताभ नामदेव नामक व्यक्ति के घर पर भी कार्रवाई हुई। वहां बड़ी संख्या में बने कमरे इस बात का सबूत थे कि यह कोई सामान्य घर नहीं बल्कि पूरी योजना के साथ बनाया गया देह व्यापार का अड्डा था।
‘फैमिली लॉज’ के बोर्ड के पीछे का कड़वा सच
शहर के कई लॉज के बाहर ‘फैमिली लॉज’ का बोर्ड लगा रहता है लेकिन वहां का नजारा इसके बिल्कुल उलट है। यहां न तो कोई पर्यटक रुकता है और न ही कोई व्यापारी आता है। पूरे दिन यहां संदिग्ध जोड़ों का आना-जाना लगा रहता है। एंट्री रजिस्टर में आधी-अधूरी जानकारी भरी जाती है और कमरों का किराया घंटों के हिसाब से वसूला जाता है। यह स्थिति न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि आसपास रहने वाले परिवारों और सामाजिक माहौल पर भी बेहद बुरा असर डाल रही है।
पुलिस का दावा और जनता की उम्मीदें
कवर्धा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी कृष्णा चंद्राकर का कहना है कि विभाग इस अनैतिक कार्य को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले एक महीने में तीन बड़े मामलों में कड़ी कार्रवाई की गई है और जहां भी सूचना मिल रही है वहां तुरंत छापेमारी की जा रही है। हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल छापेमारी काफी नहीं है। जब तक इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड और मददगारों को नहीं पकड़ा जाता तब तक कुछ दिनों की शांति के बाद यह धंधा फिर से पैर पसार लेता है।



