कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन अपहरण कांड: 14 साल बाद पूर्व नक्सली कमांडर का बड़ा खुलासा, जानें अपहरण कांड

बस्तर की माओवादी राजनीति और खूनी संघर्ष के इतिहास में साल 2012 का सुकमा कलेक्टर अपहरण कांड एक ऐसी घटना थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। अब 14 साल बाद, इस हाई-प्रोफाइल वारदात की साजिश रचने वाले पूर्व नक्सली नेता और केरलापाल एरिया कमेटी के तत्कालीन सचिव हेमला भीमा उर्फ आकाश ने आत्मसमर्पण के बाद कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। आकाश ने बताया कि कलेक्टर का अपहरण उन्हें जान से मारने के लिए नहीं, बल्कि एक खास मकसद से किया गया था। इस खुलासे ने उस समय की सुरक्षा चूक और नक्सलियों की खुफिया रणनीति पर एक बार फिर चर्चा छेड़ दी है।

“मारने का इरादा नहीं, सबक सिखाना था मकसद”

हेमला भीमा ने खुलासा किया कि नक्सलियों का मुख्य उद्देश्य कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन की हत्या करना कभी नहीं था। आकाश के अनुसार, उस समय सुकमा जिले के कई सरकारी कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण कलेक्टर की कार्यशैली से असंतुष्ट थे। कथित तौर पर प्रताड़ित कर्मियों की शिकायतों को आधार बनाकर नक्सली संगठन ने कलेक्टर को ‘सबक सिखाने’ की योजना बनाई थी। माओवादियों का मानना था कि एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी को बंधक बनाकर वे अपनी धमक पूरे देश में दिखा सकते हैं और सरकार को दबाव में ला सकते हैं।

25 लड़ाकों की टोली और हिड़मा की एंट्री

इस पूरी वारदात को शुरुआत में केरलापाल स्थानीय एरिया कमेटी के केवल 25 सशस्त्र लड़ाकों ने अंजाम दिया था। आकाश ने बताया कि जैसे ही कलेक्टर के अपहरण की खबर फैली, नक्सली संगठन के बड़े लीडर जैसे हिड़मा, सोनू और बसवाराजू इस मामले में सक्रिय हो गए। बड़े नेताओं की एंट्री के बाद यह मामला पूरी तरह से हाई-प्रोफाइल बन गया। संगठन ने कलेक्टर की रिहाई के बदले जेल में बंद अपने साथियों को छोड़ने और अन्य कड़ी शर्तें सरकार के सामने रख दी थीं, जिससे यह मामला कई दिनों तक राष्ट्रीय सुर्खियों में बना रहा।

सुरक्षा में भारी चूक: एसपी के लौटते ही हुआ हमला

आकाश ने उस दिन की सुरक्षा व्यवस्था पर चौंकाने वाला दावा किया है। उसने बताया कि 21 अप्रैल 2012 को माझीपारा में आयोजित ‘जन समस्या निवारण शिविर’ के दौरान तत्कालीन एसपी (पुलिस अधीक्षक) भी कलेक्टर के साथ मौजूद थे। लेकिन कुछ आवश्यक कार्य के कारण एसपी नीलावाया से सीधे सुकमा लौट गए और उनके साथ 15 जवान भी वापस चले गए। नक्सलियों ने ठीक इसी मौके का इंतजार किया था। आकाश का कहना है कि यदि एसपी वहां मौजूद होते, तो शायद 25 लड़ाकों की वह टीम अपहरण करने का साहस नहीं जुटा पाती।

दो जांबाज पीएसओ की शहादत और अपहरण का खौफनाक मंजर

जब नक्सलियों ने शिविर स्थल पर धावा बोला, तो कलेक्टर की सुरक्षा में तैनात दो पीएसओ (Personal Security Officers) ने अपनी जान की परवाह न करते हुए बहादुरी से मुकाबला किया। कलेक्टर को बचाने की कोशिश में दोनों पीएसओ मौके पर ही शहीद हो गए। इसके बाद नक्सली कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन को घने जंगलों की ओर ले गए। इस हिंसक वारदात ने छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

नक्सलियों के पास थी कलेक्टर के पल-पल की जानकारी

पूर्व नक्सली आकाश ने स्वीकार किया कि संगठन का खुफिया तंत्र (Local Intelligence) उस समय बेहद मजबूत था। नक्सलियों को कलेक्टर के दौरे, उनके रूट और उनके साथ रहने वाले सुरक्षा बल की संख्या की सटीक जानकारी पहले से थी। स्थानीय असंतोष का लाभ उठाकर नक्सलियों ने ग्रामीणों के बीच ही अपने मुखबिर तैनात कर रखे थे। इसी पुख्ता जानकारी के कारण वे इतने बड़े दुस्साहस को अंजाम देने में सफल रहे और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह चकमा देने में कामयाब रहे।

आत्मसमर्पण और मुख्यधारा में वापसी का संदेश

हेमला भीमा उर्फ आकाश, जिसने कभी इस बड़े कांड की पटकथा लिखी थी, अब खुद मुख्यधारा में लौट आया है। बस्तर में पुलिस के बढ़ते दबाव और ‘लोन वर्राटू’ जैसे अभियानों से प्रभावित होकर कई बड़े लीडर्स हथियार छोड़ रहे हैं। आकाश का यह खुलासा न केवल अतीत की एक काली घटना से पर्दा उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हिंसा का रास्ता चुनने वाले अंततः शांति की ओर लौट रहे हैं। प्रशासन के लिए ये खुलासे भविष्य में अधिकारियों की सुरक्षा रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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