
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार को अस्पताल के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना के बाद उपजे भारी जनाक्रोश और परिजनों के विरोध को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन बैकफुट पर आ गया है। प्रबंधन ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए बड़े मुआवजे और भविष्य की सुरक्षा का ऐलान किया है।
30-30 लाख रुपये के चेक सौंपे, आजीवन 20 हजार रुपये पेंशन का भी वादा
बढ़ते तनाव और संवेदनशील स्थिति को देखते हुए बुधवार को अस्पताल के संचालक डॉ. संदीप दवे ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। अस्पताल प्रबंधन ने तीनों मृतकों के परिवारों को 30-30 लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंप दिए हैं। इसके अलावा प्रबंधन ने घोषणा की है कि मृतकों की पत्नी या माता-पिता को जीवनभर हर महीने 20 हजार रुपये की पेंशन दी जाएगी। यह कदम पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहारा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
बच्चों की पढ़ाई और परिवार का मुफ्त इलाज उठाएगा अस्पताल
आर्थिक मुआवजे के साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने कुछ दूरगामी घोषणाएं भी की हैं। मृतकों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च अब रामकृष्ण अस्पताल उठाएगा। इसके साथ ही मृतकों के खून के रिश्तों (माता-पिता, पत्नी और बच्चे) को जीवनभर अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाएगी। प्रबंधन ने कहा है कि अंतिम संस्कार के बाद इन सुविधाओं से जुड़े सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज परिजनों को सौंप दिए जाएंगे ताकि भविष्य में उन्हें कोई परेशानी न हो।
मौत का टैंक: बिना सुरक्षा के गहराई में उतरे थे तीन मजदूर
यह हादसा उस वक्त हुआ जब अस्पताल के सेप्टिक टैंक की सफाई का काम चल रहा था। शुरुआती जानकारी के अनुसार सफाई का जिम्मा एक ठेकेदार को दिया गया था। टैंक के भीतर सालों से जमा कचरे के कारण घातक मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें बन गई थीं। बिना किसी ऑक्सीजन मास्क या सुरक्षा उपकरण के जैसे ही मजदूर टैंक के भीतर उतरे वे जहरीली गैस का शिकार हो गए और चंद मिनटों में ही उनकी जान चली गई।
पुलिस ने शुरू की जांच, पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को मिले
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने तीनों शवों को मर्चुरी भेजकर उनका पोस्टमार्टम कराया और बुधवार को गमगीन माहौल में शवों को परिजनों के हवाले कर दिया। प्रशासन की एक विशेष टीम ने घटना स्थल का निरीक्षण किया है और यह देखा है कि टैंक की बनावट और सफाई के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। पुलिस अब अस्पताल के रिकॉर्ड और ठेके की शर्तों की जांच कर रही है।
ठेकेदार पर गिरेगी गाज, लापरवाही की कड़ियां जोड़ रही पुलिस
जांच का मुख्य केंद्र अब वह ठेकेदार है जिसे सफाई का काम सौंपा गया था। पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या ठेकेदार ने मजदूरों को जरूरी सेफ्टी गियर जैसे हेलमेट, मास्क और बेल्ट उपलब्ध कराए थे। कानूनन सीवरेज टैंक में किसी भी इंसान को बिना सुरक्षा किट के उतारना जुर्म है। अगर जांच में ठेकेदार या अस्पताल के किसी अधिकारी की सीधे तौर पर लापरवाही साबित होती है तो उन पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जा सकती है।
रक्षक ही बने भक्षक: अस्पताल परिसर में सुरक्षा पर सवाल
एक नामी अस्पताल जहां लोगों की जान बचाई जाती है वहां सुरक्षा मानकों की ऐसी अनदेखी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि मशीनों के युग में इंसानों को गटर में उतारना आधुनिक गुलामी जैसा है। अस्पताल प्रबंधन ने भले ही भारी-भरकम मुआवजे का ऐलान कर दिया हो लेकिन सवाल वही है कि क्या चंद रुपयों की बचत के लिए तीन लोगों की जिंदगी दांव पर लगाना सही था।
क्या मुआवजे से खत्म हो जाएगी जवाबदेही?
रायपुर का यह गटर कांड अब चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या मामला केवल मुआवजा देने तक ही सीमित रह जाएगा या फिर दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जो भविष्य के लिए मिसाल बने। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी निष्पक्षता से की जाएगी। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन ने मृतकों के परिवार के साथ खड़े होने का दावा किया है लेकिन कानून अपनी प्रक्रिया के तहत जिम्मेदारों की पहचान करने में जुटा है।



