
कांकेर: छत्तीसगढ़ में नक्सली नेताओं सोनू और रूपेश समेत 210 माओवादियों के बड़े आत्मसमर्पण (Surrender) के बाद नक्सली खेमे में जबरदस्त अंदरूनी हंगामा मच गया है। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को लेकर माओवादी विचारधारा के भीतर दो वर्गों में बहस तेज हो गई है।
सेंट्रल कमेटी ने आत्मसमर्पण करने वालों को बताया ‘गद्दार’
नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी ने एक बयान जारी कर आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय द्वारा जारी प्रेस नोट में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को संशोधनवादी, गद्दार और धोखेबाज करार दिया गया है। बयान में कहा गया है कि हथियारबंद आंदोलन से अलग होने वाले कानू सान्याल या सीतारमैय्या जैसे लोगों को भी पहले गद्दार कहा गया था।
आत्मसमर्पित नेता रूपेश ने दी तीखी प्रतिक्रिया
सेंट्रल कमेटी के बयान के बाद, आत्मसमर्पित नक्सली नेता रूपेश उर्फ सतीश ने एक वीडियो बयान जारी कर तीखी प्रतिक्रिया दी है। रूपेश ने अपने आत्मसमर्पण की पृष्ठभूमि बताते हुए कई चौंकाने वाले राज खोले हैं।
बसवराजू शांति वार्ता चाहते थे, देवजी नहीं
रूपेश ने खुलासा किया कि पोलित ब्यूरो महासचिव बसवराजू सरकार से शांति वार्ता (Peace Talks) चाहते थे। हालांकि, माओवादी लीडर देवजी इस शांति वार्ता के पक्ष में नहीं थे। रूपेश ने कहा कि उन्होंने अपने साथियों के साथ विस्तृत चर्चा करने के बाद ही आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
बसवराजू के आखिरी पत्र में भी थी शांति वार्ता की पहल
रूपेश ने आगे बताया कि पोलित ब्यूरो महासचिव बसवराजू ने शांति वार्ता को लेकर केंद्रीय समिति के सदस्यों के नाम पत्र लिखा था, लेकिन वह महत्वपूर्ण पत्र बाकी माओवादी साथियों तक नहीं पहुंच पाया। रूपेश ने दावा किया कि बसवराजू की मौत से पहले लिखे गए आखिरी पत्र में भी शांति वार्ता की बात कही गई थी। रूपेश ने बसवराजू की इसी पहल को आगे बढ़ाया और अपने हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया।



