
छत्तीसगढ़ में मनरेगा के मुद्दे पर सियासत एक बार फिर उबलने लगी है। दिल्ली में आलाकमान के साथ चर्चा के बाद रायपुर में हुई कांग्रेस की ‘मनरेगा बचाओ संग्राम समिति’ की बैठक में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया गया है। पार्टी ने फैसला किया है कि 30 जनवरी को पूरे प्रदेश में ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक चक्काजाम किया जाएगा। इसके तुरंत बाद 31 जनवरी से 7 फरवरी तक सभी जिलों के कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत समेत तमाम दिग्गज नेता शामिल हुए।
ग्रामीण रोजगार की गारंटी पर संकट का आरोप
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं है, बल्कि यह करोड़ों ग्रामीणों के लिए रोजगार की संवैधानिक गारंटी है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार की नई नीतियां इस योजना की मूल भावना को खत्म करने की कोशिश कर रही हैं। दीपक बैज ने आशंका जताई कि सरकार की नई व्यवस्थाओं से गांवों में ठेकेदारी प्रथा को फिर से बढ़ावा मिलेगा। इससे मजदूरों को सीधे काम मिलने में परेशानी होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ेगा।
बजट में कटौती और भुगतान में देरी पर घेरा
बैठक के दौरान कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर मनरेगा के बजट में जानबूझकर कटौती करने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना है कि मजदूरी के भुगतान में महीनों की देरी हो रही है और काम के दिनों की संख्या भी घटाई जा रही है। पार्टी के मुताबिक, राज्यों पर बढ़ते वित्तीय बोझ की वजह से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं, जिसका सीधा नुकसान गरीब परिवारों और मजदूरों को उठाना पड़ रहा है। कांग्रेस ने इसे केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीति करार दिया है।
नाम बदलने और गांधीवादी सोच पर प्रहार
कांग्रेस ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिशों पर भी कड़ा एतराज जताया है। नेताओं का तर्क है कि यह सिर्फ नाम बदलने की बात नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास की उस गांधीवादी सोच पर हमला है जो गांवों को स्वावलंबी बनाने की वकालत करती है। पार्टी का मानना है कि नाम हटाने के पीछे का असली मकसद इस योजना के महत्व को कम करना है। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह गांधीजी के विचारों और ग्रामीणों के हक के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
सड़क से सदन तक जारी रहेगी लड़ाई
आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप देते हुए कांग्रेस ने ऐलान किया है कि उनकी यह लड़ाई सिर्फ चक्काजाम तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर संसद तक पुरजोर तरीके से उठाएगी। नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार मनरेगा को कमजोर करने वाले फैसले वापस नहीं लेती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। 30 जनवरी के चक्काजाम को सफल बनाने के लिए सभी जिला और ब्लॉक अध्यक्षों को सक्रिय कर दिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीतिक हलचल और तेज होने वाली है।



