
छत्तीसगढ़ की सियासत में इन दिनों शराब को लेकर घमासान मचा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो साझा कर राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बघेल ने इस वीडियो के जरिए दावा किया है कि प्रदेश में एक नया ‘शराब सिंडिकेट’ सक्रिय है, जो न केवल ब्रांड के साथ हेरफेर कर रहा है बल्कि लोगों की सेहत के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अगले ही दिन आए इस वीडियो ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
ब्रांड के ऊपर ब्रांड का खेल: स्टीकर हटाते ही खुला राज
भूपेश बघेल द्वारा साझा किए गए वीडियो में एक हैरान करने वाला नजारा दिख रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति बियर कैन के ऊपर लगा ‘7 Hills’ ब्रांड का स्टीकर हटाता नजर आता है। जैसे ही वह स्टीकर हटता है, उसके नीचे ‘Golden Bird’ ब्रांड का असली कैन दिखाई देता है। बघेल का आरोप है कि सस्ती बियर पर महंगी बियर का लेबल चिपकाकर उसे सरकारी शराब दुकानों में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर कमीशन और सेटिंग का खेल बताया है।
एक्सपायरी डेट मिटाने का आरोप: सेहत से खिलवाड़ का दावा
वीडियो में केवल ब्रांड बदलने की ही बात नहीं है, बल्कि एक और चौंकाने वाला दावा किया गया है। वीडियो में दिख रहा शख्स बता रहा है कि बियर कैन पर दी गई एक्सपायरी डेट को जानबूझकर मिटाया गया है। जब उन्होंने संदेह होने पर कस्टमर केयर नंबर पर फोन किया, तो वह बंद मिला। स्टीकर फाड़ने के बाद पता चला कि अंदर मौजूद बियर असल में एक्सपायर हो चुकी थी। विपक्ष का कहना है कि यह जनता की जान जोखिम में डालकर करोड़ों रुपये कमाने का बड़ा घोटाला है।
राजनांदगांव से हुई शुरुआत: भूपेश ने सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की जड़ राजनांदगांव को बताया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस घोटाले की शुरुआत उसी जिले से हुई है जहां के प्रभारी मंत्री लंबे समय तक विजय शर्मा रहे हैं। बघेल ने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि अफीम और अवैध शराब जैसे मामलों पर सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब का ब्रांड बदलकर करोड़ों का वारा-न्याय किया जा रहा है और इस गिरोह के सरगना को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की खामोशी पर उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने अपनी पोस्ट में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा की चुप्पी पर भी तंज कसा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर प्रदेश में इतना बड़ा खेल होने के बावजूद जिम्मेदार मौन क्यों हैं? बघेल के अनुसार, गृहमंत्री की खामोशी इस बात का सबूत है कि सब कुछ जानकारी में होते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि जनता सब समझ रही है और जल्द ही कई और बड़े खुलासे सामने आएंगे।
सिंडिकेट और कमीशनखोरी की चर्चा तेज
कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में शराब की बिक्री अब पूरी तरह से सिंडिकेट के हाथों में है। विपक्ष का कहना है कि पुरानी शराब को खपाने के लिए नए ब्रांड्स के लेबल इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यह मुद्दा केवल आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी है। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे आबकारी विभाग और सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस वीडियो की सत्यता और आरोपों पर क्या सफाई देती है।
क्या थमेगा छत्तीसगढ़ में शराब का सियासी विवाद
छत्तीसगढ़ में शराब हमेशा से ही सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा मुद्दा रही है। पिछले चुनाव में भाजपा ने शराब के मुद्दे पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार को घेरा था, और अब कांग्रेस उसी हथियार से पलटवार कर रही है। अफीम कांड के बाद अब बियर के ब्रांड बदलने के इस ताज़ा मामले ने विधानसभा सत्र के बीच सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। विपक्ष इस मुद्दे को सदन में भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।
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