मंत्री राजेश अग्रवाल की ‘सिफारिश’ पर विवाद: अधिकारी ने नियम बताए तो हुआ तबादला

रायपुर: छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल एक बार फिर अपनी सिफारिशों को लेकर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला नियुक्तियों से जुड़ा है, जहाँ मंत्री द्वारा भेजे गए एक पत्र ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। खबर है कि मंत्री अग्रवाल ने धान खरीदी केंद्रों में कुछ नियुक्तियों के लिए विभाग को पत्र लिखा था, लेकिन जब अधिकारी ने नियमों का हवाला देकर इसे मानने से इनकार किया, तो उस अधिकारी का तबादला कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है और सरकार पर सवाल उठ रहे हैं।

19 लोगों की भर्ती के लिए लिखा था ‘आदेश’ जैसा पत्र

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मंत्री राजेश अग्रवाल ने सहकारिता विभाग के उपायुक्त को एक आधिकारिक पत्र भेजा। इस पत्र में सरगुजा संभाग की विभिन्न सहकारी समितियों में 19 लोगों को कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रबंधक के तौर पर नियुक्त करने के निर्देश दिए गए थे। पत्र का लहजा पहले की तुलना में अधिक सख्त और आदेशात्मक था। मंत्री चाहते थे कि इन सभी लोगों को तत्काल प्रभाव से ज्वाइनिंग दी जाए, ताकि वे धान खरीदी केंद्रों में अपना काम शुरू कर सकें।

उपायुक्त ने नियमों का हवाला देकर रोका काम

सरगुजा संभाग की सहकारिता उपायुक्त शिल्पा अग्रवाल ने इन नियुक्तियों को हरी झंडी देने से साफ मना कर दिया। अधिकारी का तर्क था कि इस स्तर पर नियुक्तियां करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इसके लिए तय प्रक्रिया व नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बिना किसी चयन प्रक्रिया के सीधे भर्ती के इस आदेश को अधिकारी ने विभाग के मापदंडों के विरुद्ध बताया। इसी प्रशासनिक अडंगे के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि विभाग और मंत्री के बीच तालमेल बिगड़ सकता है।

मना करने के कुछ ही दिन बाद हुआ तबादला

नियमों का पालन करने वाली अधिकारी शिल्पा अग्रवाल का तबादला आदेश जारी हो गया। उन्हें उनके वर्तमान पद से हटाकर राज्य निर्वाचन आयोग में अपर सचिव के रूप में भेज दिया गया है। गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि यह ट्रांसफर मंत्री की नाराजगी का सीधा नतीजा है। प्रशासनिक हलकों में इसे ‘सजा’ के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि अधिकारी ने मंत्री के ‘अवैध’ आदेश को मानने के बजाय नियमों पर अडिग रहने का फैसला किया था।

ओएसडी और विधायक की सिफारिशों का पुराना नाता

मंत्री राजेश अग्रवाल का विवादों से यह पुराना रिश्ता है। इससे पहले वे अपने 8वीं पास ड्राइवर तबरेज आलम को अपना ओएसडी (OSD) नियुक्त करवाना चाहते थे, जिसे सामान्य प्रशासन विभाग ने शैक्षणिक योग्यता कम होने के कारण खारिज कर दिया था। केवल मंत्री ही नहीं, बल्कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने भी एक विवादास्पद व्यक्ति को धान खरीदी केंद्र का प्रभारी बनाने की सिफारिश की थी, जबकि उस व्यक्ति के खिलाफ किसानों ने पहले चक्काजाम किया था। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि नियुक्तियों में राजनीतिक दखल लगातार बढ़ रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से की कार्रवाई की मांग

इस पूरे मामले की गूंज छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी सुनाई दी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने इस मुद्दे को शून्यकाल में उठाते हुए इसे एक ‘असंवैधानिक कृत्य’ करार दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोषी लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार में अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाकर नियम विरुद्ध काम करवाए जा रहे हैं और मना करने वालों को हाशिये पर धकेला जा रहा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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