SECL कोयला खदान विस्तार को लेकर विवाद की असली वजह क्या? अंबिकापुर में मुआवज़ा, नौकरी व कोयला चोरी ने बढ़ाया घमासान

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले SECL के अमेरा ओपेन कास्ट कोयला खदान विस्तार को लेकर 3 दिसंबर 2025 को ग्रामीणों और पुलिस प्रशासन के बीच जोरदार झड़प हो गई। लगभग 10:30 बजे खदान विस्तार पर चर्चा के लिए प्रशासनिक टीम और पुलिस बल मौके पर पहुँचा था, लेकिन बातचीत के दौरान माहौल अचानक बिगड़ गया और विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। देखते ही देखते दोनों ओर से पत्थरबाज़ी शुरू हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अपर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार सहित सैकड़ों पुलिस जवान तैनात किए गए।

पत्थरबाज़ी में 40 पुलिसकर्मी और 20 ग्रामीण घायल

विवाद तब नियंत्रण से बाहर हो गया जब ग्रामीणों ने पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इस दौरान पुलिस के जवानों ने खुद को बचाने की कोशिश की। हिंसक पत्थरबाज़ी में लगभग 40 पुलिसकर्मी और 15-20 ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुए। घायलों को इलाज के लिए भेजा गया है। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में आँसू गैस के गोले दागे और ग्रामीणों को खदेड़ने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर डटे रहे।

छात्रा की गिरफ्तारी पर बढ़ा जबरदस्त आक्रोश

बताया जा रहा है कि लगभग तीन घंटे की मशक्कत के बाद स्थिति कुछ देर के लिए शांत हुई। लेकिन दोपहर 2 बजे के आसपास हालात फिर से बेकाबू हो गए। प्रशासनिक समझाइश के दौरान एक स्कूली छात्रा की गिरफ्तारी ने ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश फैला दिया। छात्रा को छुड़ाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए, जिसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि भीड़ ने पुलिस पर पत्थरों और डंडों से फिर हमला कर दिया।

मुआवजा और नौकरी का वादा पूरा न होने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि यह विवाद SECL द्वारा अपने वादे से पीछे हटने के कारण पैदा हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि 20 वर्ष पहले जब कोयला खदान खोला जा रहा था, तब उन्हें मुआवजा देने के साथ-साथ प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया गया था। लेकिन SECL अब अपने वादे से पीछे हट रहा है, इसी कारण ग्रामीण खदान विस्तार का विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन खदान को नहीं सौंपेंगे।

SECL का दावा: कुछ स्थानीय तत्व डाल रहे बाधा

वहीं इस मामले में SECL के सुरक्षा अधिकारी अमरेंद्र नारायण का कहना है कि भारत सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण कर इसे कोयला खदान के लिए SECL को दिया गया है। उनका दावा है कि कुछ स्थानीय तत्व ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर खदान कार्य रुकवाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कंपनी के काम में बाधा आ रही है।

कोयला चोरी रोकने के लिए पुलिस ने लिया पूरे क्षेत्र को नियंत्रण में

दक्षिण कोसल की पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि SECL की इस ओपेन कास्ट कोयला खदान से प्रतिदिन लाखों रुपए का कोयला चोरी होता है। इस चोरी में स्थानीय नेटवर्क शामिल है, जो चोरी किए गए कोयले का उपयोग ईंट भट्टों में करता है। खदान का विस्तार होने पर कोयला चोरी लगभग बंद हो जाएगी, जिसका नुकसान इस नेटवर्क को होगा। शाम तक अंबिकापुर पुलिस ने खदान के पूरे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया है और अवैध निर्माणों को भी खाली करा दिया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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