
भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते सितारे रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन हो गया है। वे लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में उनका उपचार चल रहा था। खानचंद सिंह स्टेज 4 लीवर कैंसर से पीड़ित थे और पिछले कई दिनों से मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखे गए थे। पिता की गंभीर हालत की जानकारी मिलते ही रिंकू सिंह चेन्नई से टी 20 वर्ल्ड कप मैच बीच में ही छोड़कर वापस आ गए थे, लेकिन वे अपने पिता को बचा नहीं सके।
बेटे को दूल्हा देखने की हसरत रही अधूरी
खानचंद सिंह के निधन के साथ ही परिवार का एक बड़ा सपना अधूरा रह गया। वे अपने लाड़ले बेटे रिंकू को दूल्हा बनते और घर में नई बहू का स्वागत होते देखना चाहते थे। रिंकू सिंह की शादी मछली शहर की सांसद प्रिया सरोज के साथ तय हुई थी। पिछले साल 8 जून को लखनऊ के एक होटल में दोनों की सगाई हुई थी। उस समारोह के दौरान खानचंद सिंह बेहद खुश थे और अपने बेटे और होने वाली बहू को लगातार आशीर्वाद दे रहे थे।

गैस सिलेंडर ढोने से लेकर क्रिकेट के सितारे तक का सफर
खानचंद सिंह की पूरी जिंदगी एक संघर्ष की कहानी रही है। उन्होंने रिंकू को क्रिकेट के मैदान तक पहुंचाने के लिए बहुत कठिन दिन देखे थे। वे अलीगढ़ की एक गैस एजेंसी में हॉकर के रूप में कार्यरत थे। सालों तक उन्होंने गैस के भारी सिलेंडर अपने कंधे पर ढोए। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि रिंकू सिंह क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बना सके। एक गरीब परिवार के बेटे को स्टार बनते देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
कई बार बदली गई शादी की तारीखें
रिंकू सिंह के विवाह को लेकर परिवार ने कई बार योजनाएं बनाईं, लेकिन क्रिकेट में व्यस्तता और अन्य कारणों से तारीखें बार-बार आगे बढ़ानी पड़ीं। पहले 18 नवंबर 2025 को विवाह की तारीख तय हुई थी, जिसे क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम के कारण टालना पड़ा। इसके बाद फरवरी 2026 में शादी की चर्चा शुरू हुई और फिर जून में विवाह का विचार किया गया। शुभ घड़ी आने से पहले ही खानचंद सिंह इस दुनिया से विदा हो गए।
शोहरत के बाद भी जमीन से जुड़े रहे खानचंद
रिंकू सिंह की कामयाबी के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। इसके बावजूद खानचंद सिंह के व्यवहार में तनिक भी परिवर्तन नहीं आया। उनके जानने वाले बताते हैं कि करोड़ों की कमाई और बेटे की शोहरत के बाद भी वे बेहद सरल थे। उनमें रत्ती भर भी अहंकार नहीं था और वे लोगों से बहुत प्रेम और मिलनसार तरीके से व्यवहार करते थे। उनकी सादगी ही उनकी असली पहचान थी।
पार्थिव शरीर की गाड़ी देखते ही टूट गए रिंकू
पिता के निधन के बाद का समय परिवार के लिए बेहद कठिन था। जब खानचंद सिंह के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने हेतु गाड़ी पहुंची, तो रिंकू सिंह पूरी तरह टूट गए। उन्होंने अपने पिता को खोने के गम में आपा खो दिया और उनका संयम जवाब दे गया। यह उनके जीवन का सबसे दुखद और भावुक क्षण था, जिसे देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
चालक से रिंकू ने की बेहद भावुक बात
रिंकू सिंह ने अपने पिता की अंतिम यात्रा की व्यवस्था पूरी जिम्मेदारी के साथ संभाली। जब शव वाहन का चालक वहां पहुंचा, तो रिंकू ने लड़खड़ाती आवाज में उसे बुलाया। उन्होंने चालक से बेहद भावुक होकर पिता के सम्मान और अंतिम विदाई से जुड़ी जरूरी बातें कहीं। यह क्षण उनकी संवेदनशीलता और पिता के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है। उन्होंने खुद ही पूरी प्रक्रिया की निगरानी की ताकि अंतिम संस्कार सही तरीके से हो सके।
खेल और व्यक्तिगत जीवन के बीच का कड़वा सच
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि खिलाड़ी भी इंसान हैं और उनके जीवन में भी ऐसे मोड़ आते हैं जब खेल और पैसा बेमानी हो जाते हैं। रिंकू सिंह ने देश के लिए मैच खेलते हुए अपने पिता को खोया है। एक तरफ जहां पूरा देश उन्हें एक आक्रामक बल्लेबाज के रूप में जानता है, वहीं दूसरी ओर वे एक ऐसे बेटे हैं जिसने अपने पिता के सपनों को अपना बनाया था। पिता की आखिरी इच्छा पूरी न हो पाने का मलाल उनके मन में हमेशा रहेगा।



