डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दर्शन अब होंगे और भी आसान: प्रशासन ने बदला एंट्री-एग्जिट का रूट, जानें नया रास्ता

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए दर्शन मार्ग में बड़ा बदलाव किया है। अब मंदिर तक पहुंचने और वहां से वापस नीचे उतरने के लिए अलग-अलग रास्ते तय कर दिए गए हैं। नवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों और विशेष मौकों पर होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए यह फैसला लिया गया है ताकि भक्तों को अफरा-तफरी का सामना न करना पड़े और मां के दर्शन सुगम हो सकें।

सीढ़ियों का नया गणित: क्षीरपानी से चढ़ाई और मोटल साइड से होगी उतराई

नई व्यवस्था के अनुसार अब श्रद्धालु मंदिर जाने के लिए क्षीरपानी की ओर स्थित पुरानी सीढ़ियों का उपयोग करेंगे। दर्शन करने के बाद नीचे आने के लिए भक्तों को मंदिर के पीछे वाले हिस्से यानी मोटल साइड वाले मार्ग का इस्तेमाल करना होगा। पहले एक ही रास्ते से लोगों के आने-जाने के कारण सीढ़ियों पर भारी दबाव रहता था और कई बार हादसे की स्थिति बन जाती थी। रास्तों के इस विभाजन से अब आवागमन एकतरफा (वन-वे) हो जाएगा जिससे श्रद्धालुओं को चलने में आसानी होगी।

भीड़ पर लगाम: पुराने रास्ते की चुनौतियों से मिलेगा छुटकारा

क्षीरपानी के पास का संकरा रास्ता पहले चढ़ाई और उतराई दोनों के लिए इस्तेमाल होता था। पीक सीजन में यहां पैर रखने तक की जगह नहीं बचती थी। प्रशासन का मानना है कि नए रूट से भीड़ का प्रबंधन करना आसान होगा। अब ऊपर जाने वाले और नीचे आने वाले श्रद्धालुओं का आमना-सामना नहीं होगा जिससे सीढ़ियों पर धक्का-मुक्की की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। मंदिर ट्रस्ट ने इस बदलाव को लेकर जगह-जगह सूचना बोर्ड भी लगा दिए हैं ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को कोई भ्रम न रहे।

श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान: धूप-बारिश से बचाव के लिए लगे शेड

मोटल साइड से नीचे उतरने के बाद श्रद्धालुओं को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए लगभग 250 मीटर का सफर पैदल तय करना होगा। बुजुर्गों और बच्चों को इस पैदल रास्ते पर परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर ट्रस्ट समिति ने पूरे मार्ग पर मजबूत शेड की व्यवस्था की है। यह शेड तेज धूप और अचानक होने वाली बारिश से भक्तों को सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके अलावा रास्ते में बैठने के लिए बेंच और पीने के पानी के इंतजाम भी किए जा रहे हैं ताकि थकान होने पर श्रद्धालु विश्राम कर सकें।

भंडारे की विशेष तैयारी: 50 गैस सिलेंडरों का बैकअप तैयार

नवरात्रि के दौरान डोंगरगढ़ में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों लोग प्रसादी ग्रहण करते हैं। वर्तमान में सिलेंडरों की किल्लत की खबरों को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही तैयारी पूरी कर ली है। मंदिर ट्रस्ट को विशेष रूप से 50 गैस सिलेंडर आवंटित किए गए हैं ताकि प्रसादी बनाने में कोई रुकावट न आए। ट्रस्ट ने आपात स्थिति के लिए पारंपरिक चूल्हों और सूखी लकड़ी का स्टॉक भी जमा कर लिया है जिससे गैस की कमी होने पर भी भंडारा अनवरत चलता रहे।

सुरक्षा और सुगमता पर जोर: ट्रस्ट और पुलिस की संयुक्त टीम तैनात

नए रूट चार्ट को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मंदिर परिसर और सीढ़ियों पर अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मंदिर के स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। मोटल साइड वाले नए एग्जिट गेट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि असामाजिक तत्वों पर नजर रखी जा सके। प्रशासन का उद्देश्य है कि डोंगरगढ़ आने वाला हर भक्त एक सुखद अनुभव लेकर वापस लौटे। नई व्यवस्था के सफल होने पर इसे स्थायी रूप से लागू रखा जा सकता है जिससे आने वाले सालों में भी दर्शन की प्रक्रिया व्यवस्थित बनी रहे।

भक्तों के लिए जरूरी सलाह: यात्रा से पहले जान लें ये बातें

मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे नए रूट चार्ट का पालन करें और सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों को सुनें। मोटल साइड से उतरते समय अपने सामान और बच्चों का विशेष ध्यान रखें क्योंकि मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए थोड़ा पैदल चलना अनिवार्य है। अगर आप रोप-वे का उपयोग करना चाहते हैं, तो उसकी बुकिंग और समय सारिणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। प्रशासन की इस पहल से डोंगरगढ़ में धार्मिक पर्यटन को एक नया और व्यवस्थित स्वरूप मिलने की उम्मीद है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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