धान खरीदी में धमतरी का दबदबा: छत्तीसगढ़ में पहला स्थान, किसानों को मिला समय पर भुगतान

खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी में धमतरी जिले ने बाजी मार ली है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई पुख्ता रणनीति और पारदर्शी व्यवस्था की बदौलत धमतरी को प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। प्रशासन ने न केवल रिकॉर्ड धान की खरीदी की, बल्कि किसानों की सुविधा और अवैध धान की आवक रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए, जिसके चलते जिले ने यह बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है।

पंजीयन और भागीदारी में भी आगे: 95 फीसदी से अधिक किसानों ने बेचा धान

जिले की 74 सहकारी समितियों के माध्यम से संचालित 100 केंद्रों पर इस साल कुल 1,29,593 किसानों ने अपना पंजीयन कराया था। इनमें सीमांत और लघु किसानों की संख्या सबसे अधिक रही। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो कुल पंजीकृत किसानों में से 95.74 प्रतिशत किसान अपना धान बेच चुके हैं, जो पूरे छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक है। प्रशासन की सक्रियता का ही परिणाम है कि अंतिम पंक्ति के छोटे किसान भी अपना अनाज बिना किसी परेशानी के बेच पाए।

करोड़ों का भुगतान और रिकॉर्ड आवक: खरीदे गए 5.91 लाख मीट्रिक टन धान

15 नवंबर 2025 से शुरू हुई खरीदी प्रक्रिया 30 जनवरी 2026 तक चली। इस दौरान जिले में 5,91,094 मीट्रिक टन धान की आवक हुई, जिसकी कुल कीमत 1,401.56 करोड़ रुपये है। प्रशासन ने भुगतान की प्रक्रिया को भी तेज रखा ताकि किसानों को अपनी उपज के पैसों के लिए इंतजार न करना पड़े। अब तक 1,17,044 किसानों के बैंक खातों में 1,324.52 करोड़ रुपये की राशि भेजी जा चुकी है। शेष राशि का भुगतान भी अंतिम चरण में है।

धान खरीदी का मुख्य डेटा चार्ट

विवरण (Description)आंकड़े (Stats)
कुल पंजीकृत किसान1,29,593
कुल उपार्जित धान5,91,094.40 मीट्रिक टन
कुल खरीदी गई राशि1,401.56 करोड़ रुपये
भुगतान की जा चुकी राशि1,324.52 करोड़ रुपये
लाभान्वित किसान (भुगतान प्राप्त)1,17,044
धान बेचने वाले किसानों का प्रतिशत95.74%

बिचौलियों पर सख्त पहरा: उड़नदस्ता टीमों ने की 24 घंटे निगरानी

धान की कालाबाजारी और अवैध आवक को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया। पड़ोसी राज्य ओडिशा की सीमा से लगे बोराई, सांकरा और बनरौद जैसे इलाकों में चेक पोस्ट बनाए गए, जहाँ 24 घंटे टीमों की तैनाती रही। राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त उड़नदस्ता टीमों ने कोचियों और बिचौलियों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस निगरानी की वजह से केवल असली किसानों का ही धान केंद्रों तक पहुंचा और बाहरी धान की घुसपैठ को पूरी तरह से रोका गया।

मिलिंग और भण्डारण की रफ्तार: 204 राइस मिलें उठा रही हैं धान

धान की खरीदी के साथ-साथ उसका उठाव (कस्टम मिलिंग) भी जिले में युद्ध स्तर पर जारी है। जिले की 204 पंजीकृत राइस मिलों को धान उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक 1.86 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठाव मिलरों द्वारा किया जा चुका है। इसके अलावा संग्रहण केंद्रों में भी सुरक्षित भण्डारण के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। मिलिंग की इस सुचारु प्रक्रिया से उपार्जन केंद्रों पर धान के जाम होने की समस्या पैदा नहीं हुई।

सुव्यवस्थित प्रबंधन का नतीजा: कलेक्टर की निगरानी में सफल हुआ अभियान

धमतरी की इस सफलता के पीछे हर केंद्र के लिए नियुक्त किए गए नोडल अधिकारियों की बड़ी भूमिका रही। जिला प्रशासन द्वारा हर हफ्ते समीक्षा बैठकें की गईं, जिससे जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं का तुरंत निराकरण हो सका। किसानों के लिए पानी, छांव और बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता रही। कलेक्टर के मार्गदर्शन में बनी इस पारदर्शी व्यवस्था ने धमतरी को न केवल राज्य में पहचान दिलाई है, बल्कि अन्य जिलों के लिए भी एक मिसाल पेश की है।

Also Read: धमतरी में सजेगा पवई रानी माता का दरबार: पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा मंदिर और वॉटरफॉल, कलेक्टर ने दिए निर्देश

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button