धमतरी के युवा किसान की बड़ी उपलब्धि, जैविक खेती से बदली तकदीर, राज्योत्सव में मिलेगा ‘डॉ. खूबचंद बघेल’ पुरस्कार

धमतरी: जिले के युवा किसान थनेन्द्र साहू को पहली बार राज्य स्तरीय “डॉ. खूबचंद बघेल कृषक अलंकरण” पुरस्कार के लिए चुना गया है। सुगंधित धान की खेती और गौ-आधारित जैविक नवाचारों के जरिए उन्होंने न केवल अपनी तकदीर बदली, बल्कि जिले और आसपास के सैकड़ों किसानों को भी प्रेरित किया है। यह सम्मान उन्हें छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में प्रदान किया जाएगा।

धमतरी के लिए गर्व का पल

यह पहली बार है जब धमतरी जिले से किसी किसान को यह राज्य स्तरीय कृषक सम्मान मिलने जा रहा है।
थनेन्द्र साहू हथबंध गांव के रहने वाले हैं और अपनी मेहनत, नवाचार और समर्पण से उन्होंने जैविक खेती के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। उनकी सफलता ने पूरे जिले को गर्व का अवसर दिया है।

सुगंधित धान और गौ आधारित जैविक खेती

थनेन्द्र साहू ने सुगंधित और औषधीय धान की खेती को अपनाकर गौ आधारित प्राकृतिक खेती को नई दिशा दी है।
वे पिछले कई वर्षों से अपने खेतों में जीवामृत, घनजीवामृत, और कीटनाशक जैसे नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और आग्नेयास्त्र स्वयं तैयार कर उपयोग करते हैं।

इन नवाचारों से

  • खेती की लागत में कमी आती है,
  • मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है,
  • और पर्यावरण पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

जिले और आसपास के किसानों को लाभ

थनेन्द्र साहू का काम केवल उनके खेत तक सीमित नहीं है।
उनके बनाए जैविक उत्पाद अब धमतरी, रायपुर, दुर्ग, बालोद और गरियाबंद जिलों के किसान भी उपयोग कर रहे हैं।
इन किसानों को उनकी तकनीक से बेहतर उत्पादन और कम लागत का लाभ मिल रहा है।

जैविक खेती में नए आयाम

थनेन्द्र साहू ने जैविक खेती को सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा।
वे पशुपालन और मशरूम उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।
उनके जैविक उत्पादों की बिक्री —

  • कृषि विभाग के मेलों में स्टाल लगाकर, और
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से
    राज्य और राज्य के बाहर भी की जाती है।

औषधीय धान और फार्म स्कूल की पहल

थनेन्द्र साहू ने औषधीय धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक “फार्म स्कूल” की स्थापना की है।
इस पहल के तहत उन्होंने 25 किसानों को प्रशिक्षण दिया है ताकि वे भी प्राकृतिक और जैविक खेती को अपनाएं।
उनके इस प्रयास को विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर सराहा गया है।

सम्मान और प्रेरणा

थनेन्द्र साहू की मेहनत और नवाचारों ने उन्हें राज्य स्तर पर सम्मान दिलाया है।
“डॉ. खूबचंद बघेल कृषक अलंकरण” पुरस्कार न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है,
बल्कि यह उन सभी किसानों के लिए प्रेरणा है जो जैविक और टिकाऊ खेती की दिशा में काम कर रहे हैं।

थनेन्द्र साहू की कहानी यह साबित करती है कि अगर मेहनत, नवाचार और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव हो,
तो खेती न केवल आत्मनिर्भरता का साधन बन सकती है बल्कि सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक भी बन सकती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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