
Diwali 2025: इस वर्ष दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है, जो इस बार दोपहर 3:45 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या की रात को स्थिर लग्न में महालक्ष्मी की पूजा करने से घर में धन और समृद्धि की स्थिरता बनी रहती है।
दिवाली पर बन रहा है 6 ग्रहों का विशेष संयोग
इस बार की दिवाली पर 6 ग्रहों का विशेष संयोग बन रहा है, जो पूजा को और अधिक फलदायी बना रहा है:
- सूर्य, मंगल और बुध तुला राशि में एक साथ—यह युति बुद्धि, नेतृत्व और सफलता में वृद्धि करेगी।
- कर्क राशि में गुरु का उच्च गोचर—यह हंस महापुरुष योग बना रहा है, जो अत्यधिक धन-संपत्ति देने वाला है।
- शुक्र और चंद्र की कन्या राशि में युति—रिश्तों में प्रेम, मानसिक शांति और सुख बढ़ेगा।
- सूर्य-बुध युति से बन रहा बुधादित्य योग—व्यक्तिगत प्रभावशालीता में वृद्धि।
दिवाली 2025: मां लक्ष्मी पूजा के शुभ मुहूर्त
| पूजा मुहूर्त | समय |
|---|---|
| गोधूलि संध्या | शाम 5:46 बजे से 6:12 बजे तक |
| प्रदोष काल | शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक |
| वृषभ लग्न | शाम 7:16 बजे से 9:09 बजे तक |
| मिथुन लग्न | रात 9:10 बजे से 11:22 बजे तक |
| सिंह लग्न | रात 1:19 बजे से 3:56 बजे तक |
| लाभ की चौघड़िया | रात 9:30 बजे से 11:29 बजे तक |
| शुभ की चौघड़िया | रात 1:03 बजे से 2:37 बजे तक |
| अमृत काल | रात 2:37 बजे से सुबह 4:11 बजे तक |
इन सभी में से वृषभ लग्न को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि यह स्थिर लग्न है और इसमें लक्ष्मी पूजन से धन की स्थिरता बनी रहती है।
कैसे करें दिवाली पर पूजा?
- घर की साफ-सफाई और सजावट सुबह से ही करें।
- महालक्ष्मी, गणेशजी और कुबेर की मूर्ति/फोटो को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
- धूप, दीप, पुष्प, नैवेद्य और जल से विधिपूर्वक पूजन करें।
- मां लक्ष्मी को कमलगट्टा और खील-बताशे का भोग लगाएं।
- परिवार सहित लक्ष्मी आरती करें और श्रीसूक्त/लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
20 अक्टूबर की रात स्थिर लग्न एवं शुभ चौघड़िया में मां लक्ष्मी का पूजन करने से वर्षभर घर में सुख-समृद्धि और धनवृद्धि बनी रहती है। इस दिवाली ग्रहों का दुर्लभ संयोग इसे और भी खास बना रहा है।
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