CG Teacher Transfer: अब ट्रांसफर में नहीं चलेगा खेल, DPI ने ऐसा फुलप्रूफ सॉफ्टवेयर बनाया कि शिक्षा के दलाल हो गए गायब

रायपुर: CG Teacher Transfer: छत्तीसगढ़ में शिक्षक ट्रांसफर के नाम पर लंबे समय से जो खेल चलता आ रहा था, अब उस पर रोक लगाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने ठोस कदम उठा लिया है। इस बार ऐसा साफ्टवेयर तैयार कराया गया है जिसमें ना तो कोई मैनुअल छेड़छाड़ संभव है, ना ही किसी अफसर या दलाल की दाल गल पा रही है। DPI ऋतुराज रघुवंशी की पहल पर बना यह सिस्टम अब पूरे राज्य में ट्रांसफर-पोस्टिंग की पारदर्शी प्रक्रिया की मिसाल बन गया है।

पुराने सिस्टम में जमकर होता था खेल

CG Teacher Transfer 2025: पहले शिक्षक ट्रांसफर में भारी गड़बड़ी होती थी। प्रमोशन के बाद पोस्टिंग के नाम पर कुछ ज्वाइंट डायरेक्टर बंद कमरे में काउंसलिंग करते थे।

Chhattisgarh Education Department: जिन स्कूलों में पद खाली होते, उन सूचनाओं को छुपा लिया जाता और बाद में मनचाही पोस्टिंग के लिए शिक्षकों से मोटी रकम वसूली जाती। एक जांच में सामने आया कि सिर्फ एक दौर की काउंसलिंग में 2800 शिक्षकों की पोस्टिंग में करीब 50 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। पांच में से चार ज्वाइंट डायरेक्टर निलंबित हुए थे।

युक्तियुक्तकरण में भी अफसरों ने की मनमानी

DPI Rituraj Raghuvanshi: हाल ही में जब 12 हजार से ज्यादा शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण हुआ, तब भी पुराने ढर्रे पर ही काउंसलिंग की गई। डीईओ और जेडी ने बंद दरवाजों के भीतर ही शिक्षकों को बुलाया। DPI ने जहां रिकॉर्डिंग का निर्देश दिया था, वहां भी इसका पालन नहीं हुआ।

अब नहीं चलेगा कोई गड़बड़झाला

QR Code Counseling System: इस बार DPI ने साफ कहा गड़बड़ी करने वालों को नहीं छोड़ा जाएगा। इसी सोच के तहत एनआईसी की मदद से एक ऐसा साफ्टवेयर तैयार कराया गया जिसमें पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन, पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनाया गया है। DPI रघुवंशी खुद इस सिस्टम की डिजाइनिंग और टेस्टिंग में लगातार जुड़े रहे।

पहली बार क्यूआर कोड से काउंसलिंग

Online Teacher Posting: देश में पहली बार किसी राज्य में शिक्षक पोस्टिंग की काउंसलिंग क्यूआर कोड से हो रही है। इससे न सिर्फ पूरा ट्रैक रिकॉर्ड सामने रहता है, बल्कि कोई मैनुअल फेरबदल भी संभव नहीं। NEET और JEE जैसी परीक्षाओं में भी अभी तक काउंसलिंग इस तरह नहीं की जाती। छत्तीसगढ़ में यह सिस्टम फिलहाल ट्रायबल संवर्ग के प्राचार्यों की पोस्टिंग में लागू हुआ है, अब जल्दी ही इसे बाकी संवर्ग में भी लागू किया जाएगा।

लाइव रिकॉर्डिंग और खाली पदों की रियल टाइम जानकारी

DPI Anti Corruption Steps: इस साफ्टवेयर में लाइव रिकॉर्डिंग की व्यवस्था है। हर काउंसलिंग का पूरा वीडियो सिस्टम में सेव होता है। अब अलग से वीडियोग्राफी कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके अलावा, शिक्षक खुद देख सकते हैं कि काउंसलिंग वाले दिन कौन से स्कूलों में पद खाली हैं। इससे ट्रांसफर के लिए शिक्षक पहले से तैयारी कर पा रहे हैं।

DPI बोले: अब गड़बड़ी की कोई जगह नहीं

CG Teacher Posting Transparency: बातचीत में DPI ऋतुराज रघुवंशी ने बताया कि इस बार तकनीक का इस्तेमाल इसलिए किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया अब शिक्षक खुद ट्रैक कर सकते हैं।

उन्होंने ये भी कहा कि जो स्कूल कल की तारीख में उपलब्ध होंगे, उनकी जानकारी आज ही सिस्टम में दिखने लगती है। इससे शिक्षक मनचाहा स्कूल चुनने के लिए कन्फ्यूजन में नहीं रहते।

अब नहीं होगी “सेटिंग” की गुंजाइश

पिछले दो दशक में शिक्षक ट्रांसफर के नाम पर करोड़ों की सेटिंग होती थी। अधिकारी, शिक्षक नेता और दलालों का एक मजबूत गठजोड़ बना हुआ था। मगर इस बार DPI के नए सिस्टम से सभी की बोलती बंद है। DPI दफ्तर के वे अधिकारी जो ट्रांसफर सीजन में सबसे ज्यादा सक्रिय रहते थे, अब किनारे हो गए हैं।

अगली बारी E संवर्ग की

Teacher Transfer QR Code System: टी संवर्ग के प्राचार्यों की पोस्टिंग के बाद अब बारी है ई संवर्ग के प्राचार्यों की ट्रांसफर प्रक्रिया की। DPI के मुताबिक अब कोई भी शिक्षक या प्राचार्य यह उम्मीद नहीं कर सकता कि वह किसी को पैसे देकर अपनी मनपसंद पोस्टिंग करा लेगा।

छत्तीसगढ़ में शिक्षक ट्रांसफर को लेकर DPI का नया डिजिटल सिस्टम न केवल पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इससे शिक्षा विभाग की छवि भी सुधरी है। अफसरों की दलाली, दलालों की सेटिंग और शिक्षकों की मजबूरी तीनों पर एक साथ लगाम लगाने वाला यह सिस्टम अब दूसरे राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।

Also Read: CG Sub-Inspectors Promotion: 25 सब-इंस्पेक्टर बने निरीक्षक, देखें सूची…

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button