
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक कथावाचक और प्रदेश के कद्दावर मंत्री के बीच का विवाद अब सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सुर्खियां बटोर रहा है। मशहूर कथावाचक डॉ. राम अनुरागी का एक वीडियो वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है। डॉ. अनुरागी ने राज्य के कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मंत्री जी ने उनसे कथा तो करवाई, लेकिन तय की गई दक्षिणा का भुगतान आज तक नहीं किया। मामला इतना बढ़ गया है कि कथावाचक ने अब भुगतान न होने की स्थिति में आत्मदाह करने तक की चेतावनी दे दी है।
“पैसे मांगे तो धक्का देकर निकाला बाहर”
डॉ. राम अनुरागी का आरोप है कि उन्होंने मंत्री राजेश अग्रवाल के यहां पूरी श्रद्धा के साथ कथा संपन्न की थी, लेकिन जब अपनी मेहनत की राशि मांगने की बारी आई तो उन्हें केवल तारीखें मिलीं। वीडियो में उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे कई बार मंत्री से मिलने उनके दफ्तर और निवास पहुंचे, लेकिन वहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। आरोप है कि मंत्री के स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर बाहर निकाल दिया। इस अपमान से आहत होकर कथावाचक विरोध जताने विधानसभा तक पहुंच गए।
कांग्रेस का तीखा हमला: “सरकार की संवेदनहीनता चरम पर”
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने इस मामले को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि एक कलाकार और धर्मगुरु को अपनी मेहनत की कमाई के लिए इस तरह भटकना पड़ रहा है, यह सरकार की संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार इस मामले में तुरंत दखल दे और कथावाचक को उनकी तय राशि का भुगतान सुनिश्चित कराए। साथ ही, मंत्री राजेश अग्रवाल को इस व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा: “घर की मुर्गी दाल बराबर”
कांग्रेस ने इस विवाद के जरिए ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ का मुद्दा भी छेड़ दिया है। धनंजय सिंह ठाकुर का आरोप है कि भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ के स्थानीय कथावाचकों और कलाकारों की उपेक्षा कर रही है। उनका कहना है कि बाहर से आने वाले कथावाचकों को हवाई जहाज से बुलाया जाता है और पूरा प्रशासनिक अमला उनकी सेवा में लगा रहता है, जबकि प्रदेश के ही विद्वानों को उनके हक के पैसे के लिए रुलाया जा रहा है। कांग्रेस ने इसे स्थानीय प्रतिभाओं का अपमान करार दिया है।
पंडित युवराज पांडेय के मामले का भी दिया हवाला
राजनीतिक बयानबाजी के बीच कांग्रेस ने पुरानी घटनाओं की याद भी दिलाई। प्रवक्ता ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है; इससे पहले कथावाचक पंडित युवराज पांडेय को भी सुरक्षा और सम्मान देने में सरकार ने आनाकानी की थी। अब डॉ. राम अनुरागी के साथ जो हो रहा है, उससे साफ संदेश जा रहा है कि प्रदेश के कथावाचकों के हितों की रक्षा करने में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।
आत्मदाह की चेतावनी से प्रशासन के हाथ-पांव फूले
डॉ. राम अनुरागी द्वारा आत्मदाह की चेतावनी दिए जाने के बाद पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है। एक प्रतिष्ठित कथावाचक द्वारा उठाया गया यह कदम सरकार की छवि खराब कर सकता है, इसलिए इसे दबाने और सुलझाने की कोशिशें अंदरूनी तौर पर तेज हो गई हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक मंत्री राजेश अग्रवाल या सरकार के किसी अधिकृत प्रवक्ता की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्टीकरण या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
क्या निकलेगा विवाद का हल?
फिलहाल रायपुर की फिजाओं में इस विवाद की चर्चा आम है। आम नागरिक भी इस बात को लेकर हैरान हैं कि धर्म और संस्कृति की दुहाई देने वाली सरकार के मंत्री पर एक कथावाचक ने ऐसे आरोप लगाए हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मंत्री जी इस विवाद को शांति से सुलझाते हैं या फिर यह मामला आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले लेगा।



