महादेव ऐप पर ED की बड़ी कार्रवाई: सौरभ चंद्राकर और करीबियों की 91.82 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क, सट्टे की काली कमाई का ‘शेयर बाजार’ कनेक्शन उजागर

रायपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रायपुर जोनल ऑफिस ने महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज (Skyexchange) के खिलाफ जारी जांच में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए इन सट्टेबाजी ऐप्स के संचालकों की करीब 91.82 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच कर लिया है। इस कार्रवाई में सौरभ चंद्राकर और विकास छपारिया की विदेशी कंपनियों के बैंक खातों में जमा 74 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को फ्रीज किया गया है। ईडी के मुताबिक, इन रुपयों को अपराध की कमाई छिपाने के लिए निवेश के तौर पर दिखाया गया था। इसके अलावा स्काईएक्सचेंज के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपये की जायदाद भी कुर्क की गई है।

कैसे चलता था धोखाधड़ी का खेल: ऐप्स में होती थी हेराफेरी, हारने के लिए मजबूर किए जाते थे ग्राहक

ईडी की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज जैसे ऐप्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि जनता को अंततः नुकसान ही हो। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए हजारों करोड़ रुपये इकट्ठे किए गए और फिर उन्हें सट्टेबाजों के बीच एक तय हिस्सेदारी के हिसाब से बांट दिया गया। इतना ही नहीं, बैंक खाते खोलने के लिए दूसरों के केवाईसी (KYC) दस्तावेजों की चोरी की गई या फर्जी कागजात इस्तेमाल किए गए। इन अवैध खातों के जरिए पैसों की कई परतें (Layering) बनाई गईं ताकि उनके असली स्रोत का पता न चल सके और टैक्स की चोरी की जा सके।

हवाला और क्रिप्टो का खतरनाक जाल: भारत से बाहर भेजा गया पैसा, फिर ‘FPI’ बनकर शेयर बाजार में लौटा

जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से कमाए गए काले धन को हवाला, ट्रेड-आधारित मनी लॉन्ड्रिंग और क्रिप्टो करेंसी के जरिए भारत से बाहर भेजा गया। बाद में इसी पैसे को ‘फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट’ (FPI) के नाम पर वापस लाकर भारतीय शेयर बाजार में निवेश कर दिया गया। ईडी ने एक जटिल ‘कैशबैक’ स्कीम का भी पर्दाफाश किया है। इसके तहत ये विदेशी कंपनियां भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी निवेश करती थीं। बदले में उन कंपनियों के प्रमोटर निवेश की गई राशि का 30 से 40 फीसदी हिस्सा संचालकों को नकद में वापस लौटा देते थे। गगन गुप्ता को ऐसी ही डील्स से लगभग 98 करोड़ रुपये का मुनाफा होने की बात सामने आई है।

शेल कंपनियों के जरिए निवेश: सालासर टेक्नो और टाइगर लॉजिस्टिक्स जैसी कंपनियां जांच के घेरे में

जांच एजेंसी को पुख्ता सबूत मिले हैं कि गगन गुप्ता ने मेसर्स सालासर टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और मेसर्स टाइगर लॉजिस्टिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियों के साथ मिलकर संदिग्ध लेनदेन किए थे। इन कंपनियों के जरिए सट्टेबाजी की कमाई को सफेद करने की कोशिश की गई। ईडी अब उन प्रमोटरों और बिचौलियों की पहचान कर रही है जिन्होंने इस ‘कैशबैक’ सिंडिकेट में सट्टेबाजों की मदद की थी। इस पूरे नेक्सस ने भारतीय वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास किया है, जिसे अब ईडी धीरे-धीरे बेनकाब कर रही है।

अब तक 2600 करोड़ की संपत्ति जब्त: 175 ठिकानों पर छापेमारी, सट्टेबाजी गिरोह के खिलाफ जारी है महाअभियान

महादेव सट्टा ऐप मामले में ईडी अब तक देश-विदेश में 175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ रहा है, जब्त संपत्तियों का आंकड़ा भी आसमान छू रहा है। अब तक कुल मिलाकर लगभग 2,600 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति या तो जब्त की जा चुकी है या उन्हें फ्रीज कर दिया गया है। ईडी के अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए जनता को लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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