
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में इन दिनों पुलिस जोर-शोर से ‘सड़क सुरक्षा माह’ मना रही है, लेकिन खुद प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आए। मंत्री जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे बिना हेलमेट पहने शहर की सड़कों पर बाइक दौड़ा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस वीडियो को उन्होंने खुद ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि जो मंत्री बच्चों को स्कूलों में सुरक्षा का पाठ पढ़ाते हैं, वे खुद नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहे।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे, पुलिस पर उठाए सवाल
मंत्री के इस वीडियो पर फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। लोग तंज कस रहे हैं कि क्या हेलमेट पहनने से ‘बाहुबली’ का चेहरा छिप जाएगा। सोशल मीडिया पर लोग दुर्ग पुलिस की चुप्पी पर भी सवाल उठा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि अगर कोई आम नागरिक बिना हेलमेट के निकलता है, तो पुलिस तुरंत रसीद काट देती है, लेकिन मंत्री जी के मामले में सब मौन हैं। इंटरनेट पर लोगों ने जो प्रतिक्रियाएं दी हैं, उनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
- संदीप ताम्रकार: मंत्री जी को नियमों का पालन करना चाहिए, वरना संतरी की क्या हिम्मत कि चालान काट सके।
- विजय गुप्ता: पुलिस अगर कभी आपका चालान काटे तो यही वीडियो दिखा देना, इसे सेव करके रख लो।
- डोमेश्वर साहू: ये कैसे शिक्षा मंत्री हैं जिन्हें इतनी भी समझ नहीं कि बाइक पर हेलमेट जरूरी है।
- विकास चंद्राकर: क्या यही अच्छे दिन हैं? चालान सिर्फ आम आदमी के लिए है, मंत्रियों के लिए नहीं।

पुलिस चला रही अभियान, छात्रों के काटे जा रहे चालान
एक तरफ दुर्ग पुलिस स्कूलों के बाहर चेकिंग अभियान चलाकर छात्रों के चालान काट रही है, वहीं दूसरी तरफ मंत्री और उनके समर्थक बेखौफ बिना हेलमेट घूम रहे हैं। प्रशासन ने पेट्रोल पंपों पर भी नियम सख्त कर दिए हैं कि बिना हेलमेट किसी को तेल नहीं दिया जाएगा। ऐसे में मंत्री जी की यह हरकत पुलिस और प्रशासन के इन प्रयासों पर पानी फेरती नजर आ रही है। सड़क सुरक्षा माह के दौरान एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की लापरवाही समाज में गलत संदेश दे रही है।
देखिये वीडियो-
क्या कानून सबके लिए बराबर है? उठ रहे गंभीर सवाल
मंत्री गजेंद्र यादव के साथ चल रहे उनके समर्थक भी वीडियो में बिना हेलमेट नजर आ रहे हैं। यह घटना बताती है कि रसूख के आगे नियम-कायदे अक्सर बौने साबित होते हैं। अब जनता यह पूछ रही है कि क्या दुर्ग पुलिस में इतनी हिम्मत है कि वह मंत्री जी के घर चालान भेजे? अगर जनप्रतिनिधि ही उदाहरण पेश नहीं करेंगे, तो आम जनता से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। फिलहाल इस मामले में पुलिस के किसी भी बड़े अधिकारी ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।




