
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में बिजली के नए स्मार्ट मीटर अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनते जा रहे हैं। बिलों में अचानक हुई बेतहाशा बढ़ोतरी ने मध्यम और गरीब वर्ग की कमर तोड़ दी है। ताजा मामला कारेसरा गांव का है जहां एक दिव्यांग महिला रूखमणि यादव को बिजली विभाग ने 27 हजार रुपये का बिल थमा दिया। इस भारी भरकम बिल को देखकर महिला के होश उड़ गए और वह न्याय की उम्मीद में कलेक्ट्रेट के चक्कर काटने को मजबूर है।
पहले मामूली आता था बिजली का खर्च
रूखमणि यादव ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने से पहले उनका बिजली बिल काफी कम आता था। सामान्य तौर पर उन्हें 700 से 800 रुपये ही चुकाने पड़ते थे और कभी-कभी यह राशि अधिकतम 1500 रुपये तक पहुंचती थी। लेकिन जैसे ही नया मीटर लगा बिल की राशि सीधे 27 हजार रुपये पर पहुंच गई। ठंड के मौसम में जब बिजली की खपत वैसे ही कम होती है तब इतना ज्यादा बिल आना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सीमित उपकरणों के बावजूद भारी बिल
हैरानी की बात यह है कि रूखमणि के घर में बिजली की खपत के नाम पर बहुत कम उपकरण हैं। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उनके घर में केवल 9 और 12 वॉट के दो-तीन छोटे बल्ब और एक पंखा ही चलता है। इतने कम उपकरणों के साथ हजारों का बिल आना तकनीकी खामी या विभाग की बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। इतनी सीमित आय में इतना बड़ा बिल चुकाना एक दिव्यांग महिला के लिए नामुमकिन सा हो गया है।
न्याय के लिए 12 किलोमीटर का कठिन सफर
अपनी व्यथा सुनाने के लिए रूखमणि को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद वह दूसरे की मदद से मोटरसाइकिल पर बैठकर 12 किलोमीटर दूर कारेसरा से बेमेतरा कलेक्ट्रेट पहुंचीं। वहां उन्होंने अपर कलेक्टर से मुलाकात कर अपना दुखड़ा सुनाया और बिल कम करने की गुहार लगाई। अधिकारियों ने मामले की जांच का भरोसा दिया है लेकिन स्मार्ट मीटर की इस मार से फिलहाल ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है।



