
धमतरी। छत्तीसगढ़ में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) घोटाले की जाँच के सिलसिले में EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में, EOW की टीम ने धमतरी जिले के एक ठेकेदार के घर पर छापा मारा। कुरुद थाना क्षेत्र के ग्राम सिर्री में यह कार्रवाई लगभग 5 घंटे तक चली, जिसमें टीम ने महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
ठेकेदार अभिषेक त्रिपाठी के घर पर हुई रेड
बताया जा रहा है कि EOW की 8 सदस्यीय टीम सुबह करीब 7 बजे दो वाहनों में ग्राम सिर्री पहुँची और ठेकेदार अभिषेक त्रिपाठी के घर पर छापा मारा। DMF घोटाले से जुड़े मामलों को लेकर टीम ने त्रिपाठी से लगभग 5 घंटे तक पूछताछ की और घर की गहन जाँच-पड़ताल की। कार्रवाई समाप्त होने के बाद, अधिकारी अपने साथ लाल रंग की एक पोटली में अहम दस्तावेज लेकर गए, जिससे यह संकेत मिलता है कि जाँच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हाथ लगे हैं।
रायपुर और राजनांदगाँव में भी हुई कार्रवाई
DMF घोटाले को लेकर ACB (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और EOW द्वारा छत्तीसगढ़ के कई जिलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है। धमतरी के अलावा, रायपुर, राजनांदगाँव और दुर्ग में भी छापेमारी की गई है:
- रायपुर: पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इन्क्लेव में इक्विपमेंट सप्लाई का काम करने वाले कारोबारी अशोक और अमित कोठारी के घर पर रेड की गई।
- राजनांदगाँव: यहाँ तीन स्थानों पर एक साथ छापे मारे गए।
- दुर्ग: महावीर नगर स्थित कारोबारी नीलेश पारख के यहाँ भी जाँच जारी है।
ED के दावे के अनुसार क्या है DMF घोटाला?
यह पूरी कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) में हुए व्यापक भ्रष्टाचार से जुड़ी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर ही EOW ने धारा 120 बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है।
- अनियमितता: केस के अनुसार, कोरबा के DMF फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएँ की गईं।
- कमीशन का प्रतिशत: ED के तथ्यों के मुताबिक, टेंडर की राशि का 40% तक कमीशन सरकारी अफसरों को दिया गया।
- IAS रानू साहू का एंगल: आरोप है कि कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित IAS रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत की। मनोज ने अपने NGO उदगम सेवा समिति के नाम पर ठेके लिए और अधिकारियों को टेंडर राशि का 42% तक कमीशन दिया।
- निकासी: ठेकेदारों के बैंक खातों में जमा की गई राशि का बड़ा हिस्सा सीधे कैश में निकाल लिया गया। इसके अलावा, प्राइवेट कंपनियों के टेंडर पर 15 से 20% अलग-अलग कमीशन सरकारी अधिकारियों ने लिया है।
ED का दावा है कि रानू साहू और कुछ अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और इसी संबंध में ठेकेदारों और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर रेड की गई थी।



