
राजधानी रायपुर का स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, लेकिन एक शातिर युवक ने यहां सुरक्षा घेरे को भेदने की हिमाकत कर दी। 12 मार्च को रायपुर से इंदौर जाने वाली फ्लाइट पकड़ने पहुंचे एक यात्री को सीआईएसएफ (CISF) के जवानों ने संदेह के आधार पर रोका। जब उसकी बारीकी से जांच की गई, तो परत-दर-परत एक बड़ी धोखाधड़ी सामने आई। यह युवक किसी दूसरे व्यक्ति की हवाई टिकट पर फर्जी आधार कार्ड के सहारे सफर करने की फिराक में था। सुरक्षा अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को दबोच लिया और उसे माना थाना पुलिस के हवाले कर दिया।
सुरक्षा घेरे में फंसा ‘कुलदीप’: ऐसे खुला राज
दरअसल, इंदौर निवासी आरोपी कुलदीप सिंघल रायपुर एयरपोर्ट पहुंचा और बोर्डिंग पास लेने की कोशिश करने लगा। एंट्री गेट पर जब सुरक्षाकर्मियों ने उससे पहचान पत्र मांगा, तो उसने एक आधार कार्ड पेश किया। जांच के दौरान जवानों को कार्ड की छपाई और फोटो पर संदेह हुआ। अधिकारियों ने जब तकनीकी रूप से कार्ड की पड़ताल की, तो पता चला कि यह आधार कार्ड ‘कूटरचित’ यानी फर्जी है। आरोपी ने बड़ी चालाकी से असली आधार कार्ड से मूल फोटो को हटाकर अपनी फोटो चिपका दी थी, ताकि वह सुरक्षाकर्मियों की आंखों में धूल झोंक सके।
‘स्नेहिल’ बनकर उड़ना चाहता था आरोपी
पुलिसिया जांच में खुलासा हुआ कि कुलदीप सिंघल असल में ‘स्नेहिल राजू भाई पटेल’ नाम के व्यक्ति की टिकट पर यात्रा कर रहा था। उसने स्नेहिल के ही आधार कार्ड के साथ छेड़छाड़ की थी। आरोपी ने न केवल पहचान पत्र बदला, बल्कि पूरी पहचान चुराकर हवाई सफर करने की साजिश रची थी। एयरपोर्ट जैसे हाई-सिक्योरिटी जोन में इस तरह की सेंधमारी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर आरोपी को दूसरे की टिकट और पहचान पत्र कैसे मिला?
आरोपी का पता और पुलिसिया कार्रवाई
पकड़ा गया आरोपी कुलदीप सिंघल मूल रूप से इंदौर के विजय नगर क्षेत्र का रहने वाला है, जो फिलहाल खंडवा के लिम्बोदी इलाके में रह रहा था। माना थाना पुलिस ने एयरपोर्ट अथॉरिटी की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
मकसद की तलाश: आखिर क्यों की धोखाधड़ी?
माना पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी है कि कुलदीप का दूसरे की पहचान पर सफर करने के पीछे असली मकसद क्या था? क्या वह किसी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अपनी पहचान छिपा रहा था या फिर इसके पीछे कोई और बड़ी साजिश थी? पुलिस ‘स्नेहिल राजू भाई पटेल’ के बारे में भी जानकारी जुटा रही है, जिसके नाम पर टिकट बुक की गई थी। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि फर्जी आधार कार्ड तैयार करने में आरोपी की मदद किसने की।
एयरपोर्ट सुरक्षा पर बढ़ी सतर्कता
इस घटना के बाद रायपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था को और भी कड़ा कर दिया गया है। एयरलाइंस कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों को पहचान पत्रों के फिजिकल वेरिफिकेशन के साथ-साथ डिजिटल क्रॉस-चेकिंग के भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फर्जीवाड़े के ऐसे मामलों को रोकने के लिए अब तकनीक का और अधिक सहारा लिया जाएगा। यात्रियों से भी अपील की गई है कि वे केवल वैध दस्तावेजों के साथ ही यात्रा करें, वरना उन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है।
कानून के शिकंजे में जालसाज
फिलहाल आरोपी कुलदीप जेल की सलाखों के पीछे है और पुलिस की तफ्तीश जारी है। साइबर सेल की मदद से आरोपी के मोबाइल और पुराने रिकॉर्ड्स भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस को शक है कि आरोपी पहले भी इस तरह के हथकंडे अपना चुका होगा। माना थाना प्रभारी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिसके आधार पर चार्जशीट दाखिल की जाएगी।



