
रायपुर: Gangrel Dam Water Release: प्रदेश में पिछले 10 दिनों से लगातार बनी मानसून ब्रेक की स्थिति और कई क्षेत्रों में खंडवृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर गंगरेल डैम के कमांड क्षेत्र के गांवों में खेतों में खड़ी धान की फसल को अब सिंचाई के पानी की सख्त जरूरत महसूस होने लगी है। हालात को देखते हुए किसानों ने गंगरेल से सिंचाई पानी छोड़ने की मांग की है।
पूर्व अध्यक्षों की बैठक में बनी सहमति
बंगोली सिंचाई उपसंभाग के अंतर्गत आने वाली सिंचाई पंचायतों के पूर्व अध्यक्षों ने शुक्रवार को एक बैठक आयोजित कर हालात की समीक्षा की। बैठक में निर्णय लिया गया कि गंगरेल से जल्द सिंचाई जल छोड़े जाने की मांग सरकार तक पहुंचाई जाएगी। इस प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा को ज्ञापन सौंपा, जिन्होंने यह मांग राज्य के जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप तक मेल के माध्यम से पहुंचा दी है।
गांवों में खड़ी फसल को बचाना मुश्किल
किसानों का कहना है कि यदि दो-तीन दिन के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई, तो खेतों में खड़ी धान की फसल सूखने लगेगी। खंडवृष्टि के कारण कई गांव अब तक बारिश से पूरी तरह वंचित रहे हैं। ऐसे में गंगरेल डैम में उपलब्ध जल ही अब एकमात्र विकल्प रह गया है।
गंगरेल की जलस्तर स्थिति को देखते हुए की गई मांग
Gangrel Water Level Update: बैठक में चिन्ताराम वर्मा, थानसिंह साहू, हिरेश चंद्राकर, मनमोहन गुप्ता, गोविंद चंद्राकर, प्रहलाद चंद्राकर, तुलाराम चंद्राकर, धनीराम साहू, भारतेन्दु साहू और योगेश चंद्राकर समेत कई लोगों ने भाग लिया। सभी ने गंगरेल में जलभराव की स्थिति को देखते हुए सिंचाई पानी तुरंत छोड़े जाने पर सहमति जताई।
कुरूद टैंक से छोड़ा गया नहर में पानी
पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा ने जानकारी दी कि तिल्दा जल प्रबंध संभाग के अंतर्गत आने वाले उपसंभागों ने भी वरिष्ठ अधिकारियों को किसानों की मांग से अवगत करा दिया है। उधर कुरूद क्षेत्र में टैंक के भर जाने के बाद जब ग्रामीणों ने ध्यान दिलाया कि अतिरिक्त पानी व्यर्थ नाले में जा रहा है, तो उन्होंने कार्यपालन अभियंता सतीश धवन से नहर में पानी छोड़ने का आग्रह किया। इसके बाद शनिवार को कुरूद टैंक से नहर में सिंचाई जल छोड़ा गया।
फिलहाल गंगरेल क्षेत्र के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। अगर जल्द बारिश नहीं हुई, तो गंगरेल से सिंचाई जल जारी करना ही एकमात्र रास्ता होगा जिससे धान की फसल को बचाया जा सके।
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