
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में कृषि के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। गंगरेल बांध के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बसे ग्राम डांगीमांचा और खिड़कीटोला में लगभग 50 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद रबी सीजन में संगठित खेती की वापसी हुई है। वनाच्छादित और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस उच्चहन क्षेत्र में लंबे समय से दूसरी फसल लेना नामुमकिन माना जा रहा था। लेकिन कृषि विभाग की ‘आत्मा’ योजना के तहत किए गए प्रयासों ने इस धारणा को बदल दिया है। अब यहां के खेतों में रागी (मिलेट) की फसल लहलहा रही है, जिससे स्थानीय किसानों के चेहरे पर आधी सदी बाद मुस्कान लौटी है।
35 एकड़ में रागी का सफल प्रयोग
सरकार की प्राथमिकता के अनुसार, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लघु धान्य फसलों यानी मिलेट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में डांगीमांचा और खिड़कीटोला के लगभग 35 एकड़ रकबे में रागी की खेती शुरू की गई है। इस पहल को कृषि विभाग एक ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहा है क्योंकि दशकों से यह इलाका रबी के दौरान खाली पड़ा रहता था। अब आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों के माध्यम से किसानों को इस पारंपरिक फसल की ओर दोबारा मोड़ा गया है, जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
SMI पद्धति से खेती की बारीकियां सीख रहे किसान
रागी के बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को आधुनिक ‘सिस्टमैटिक मिलेट्स इंटेंसिफिकेशन’ (SMI) पद्धति का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हाल ही में आयोजित कृषक पाठशाला में 40 महिला और 32 पुरुष किसानों ने हिस्सा लिया, जहां उन्हें बीज उत्पादन से लेकर फसल प्रबंधन की बारीकियां समझाई गईं। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि कैसे वे पुरानी पद्धति के बजाय उन्नत तकनीक अपनाकर उत्पादन लागत कम कर सकते हैं और अधिक लाभ कमा सकते हैं। साथ ही पोषक तत्वों के प्रबंधन और कीट नियंत्रण के व्यावहारिक तौर-तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई ताकि फसल की गुणवत्ता वैश्विक मानकों के अनुरूप हो।
पोषण सुरक्षा और आर्थिक मजबूती पर जोर
रागी केवल एक फसल नहीं है, बल्कि यह आयरन, कैल्शियम और अन्य खनिज तत्वों से भरपूर एक सुपरफूड है। कृषक पाठशाला में रागी के स्वास्थ्य लाभों और इसकी वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया। शासन की योजना आने वाले समय में इन किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने की है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। रागी की खेती न केवल जलवायु परिवर्तन के अनुकूल है, बल्कि यह आदिवासी समाज की पुरानी खाद्य संस्कृति का हिस्सा भी रही है। इसे दोबारा अपनाने से क्षेत्र में कुपोषण के खिलाफ जंग को भी मजबूती मिलेगी।
भविष्य के लिए नई उम्मीदें और विस्तार की योजना
कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत तुमराबहार के सरपंच और कृषि अधिकारियों ने किसानों को शासन की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उपस्थित किसानों ने इस प्रयोग की सफलता को देखते हुए भविष्य में रागी की खेती का रकबा बढ़ाने पर अपनी सहमति जताई है। जिला प्रशासन की योजना है कि आने वाले सालों में मिलेट आधारित खेती का विस्तार अन्य पड़ोसी गांवों में भी किया जाए। इससे न केवल वनांचल के किसानों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा, बल्कि धमतरी जिले को प्रदेश के मिलेट हब के रूप में एक नई पहचान भी मिलेगी।



