
देश का आम बजट पेश होने की घड़ी आ चुकी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी रविवार, 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। यह मोदी सरकार 3.0 का तीसरा पूर्ण बजट है। वित्त मंत्री के नाम आज एक बड़ा रिकॉर्ड भी दर्ज होगा क्योंकि वे लगातार 9वीं बार देश का बजट पेश करने जा रही हैं। वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव और व्यापारिक चुनौतियों के बीच आ रहे इस बजट से हर वर्ग को कुछ न कुछ बड़ी राहत मिलने की आस है।
मध्यम वर्ग को टैक्स में और छूट की उम्मीद
सैलरीड क्लास यानी नौकरीपेशा लोगों की निगाहें एक बार फिर इनकम टैक्स स्लैब पर टिकी हैं। पिछले बजट में सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी थी। इस बार भी लोग उम्मीद कर रहे हैं कि स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाई जाएगी और टैक्स के बोझ को और कम किया जाएगा। बढ़ती महंगाई को देखते हुए मिडिल क्लास चाहता है कि उनकी बचत और निवेश पर सरकार कुछ अतिरिक्त फायदे दे।
किसानों और ग्रामीण विकास पर फोकस
खेती-किसानी के लिए यह बजट काफी अहम माना जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट में बढ़ोतरी के साथ-साथ खेती की आधुनिक तकनीकों के लिए विशेष फंड का ऐलान हो सकता है। सरकार का जोर ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है, इसलिए सिंचाई परियोजनाओं और खाद-बीज पर सब्सिडी को लेकर बड़ी घोषणाएं संभव हैं। पिछले साल की तरह इस बार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई योजनाओं का खाका खींचा जा सकता है।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष सौगात
मोदी सरकार अपने हर बजट में महिलाओं और बुजुर्गों के लिए कुछ न कुछ विशेष प्रावधान करती रही है। इस बार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सूक्ष्म ऋण और कौशल विकास कार्यक्रमों के बजट में बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य बीमा और सस्ती दवाओं के दायरे को बढ़ाने की मांग की जा रही है। आयुष्मान भारत योजना के तहत कवरेज की सीमा बढ़ाने का ऐलान भी इस वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
बजट की घोषणाओं के लिए रविवार को भी खुला रहेगा शेयर बाजार
आमतौर पर शनिवार और रविवार को शेयर बाजार बंद रहता है, लेकिन इस बार बजट के चलते 1 फरवरी को बाजार खुला रहेगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सामान्य दिनों की तरह ट्रेडिंग होगी। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बजट की घोषणाओं पर बाजार अपनी तत्काल प्रतिक्रिया दे सके और निवेशकों को किसी भी तरह की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि इंफ्रास्ट्रक्चर और डिफेंस जैसे सेक्टर के लिए सरकार कितना पैसा खर्च करती है।
बजट की तैयारी और पिछले साल का असर
पिछले साल का बजट काफी लोकप्रिय रहा था क्योंकि इसमें आम जनता की जेब का ख्याल रखा गया था। इस साल वित्त मंत्री के सामने चुनौती यह है कि वे आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बनाए रखें और राजकोषीय घाटे को भी नियंत्रण में रखें। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देना भी सरकार की प्राथमिकता सूची में है। अब देखना होगा कि 11 बजे जब बजट का पिटारा खुलेगा, तो उसमें से किसके लिए खुशियां निकलती हैं।
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