
रायपुर: CG DJ Ban: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तेज आवाज में डीजे और साउंड सिस्टम बजाने पर रोक लगाने को लेकर राज्य सरकार से सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब कोलाहल नियंत्रण अधिनियम (Noise Pollution Act) को लागू करने में देरी नहीं चलेगी। त्योहारों और सामाजिक आयोजनों में कानफोड़ू आवाज से बजने वाले डीजे पर सख्त कार्रवाई होगी। नियम तोड़ने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल तक की सजा हो सकती है।
500 रुपये की पुरानी पेनाल्टी से नहीं बनेगा काम
Chhattisgarh DJ Ban: कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि अब तक के नियम इतने कमजोर हैं कि डीजे संचालकों को केवल 500 से 1000 रुपये का जुर्माना भरकर छोड़ा जा रहा है। इससे न तो नियमों का पालन हो रहा है और न ही शोर पर कोई नियंत्रण दिख रहा है। कोर्ट ने माना कि इस ढीली व्यवस्था में सख्ती जरूरी है, जिससे आम लोगों को राहत मिल सके।
अब अगर कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा डीजे उपकरण जब्त करने और वाहनों पर लगे साउंड सिस्टम हटाने की भी व्यवस्था रहेगी।
लेजर और बीम लाइट पर भी जताई चिंता
High Court DJ Ban Order: कोर्ट ने डीजे के साथ-साथ लेजर और बीम लाइट के उपयोग पर भी चिंता जताई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ये लाइट्स कई बार लोगों की आंखों को नुकसान पहुंचाती हैं और पब्लिक इवेंट्स में अनियंत्रित तरीके से इनका इस्तेमाल होता है। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ आवाज ही नहीं, प्रकाश प्रदूषण पर भी नियंत्रण जरूरी है। सरकार को इस दिशा में भी सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन ने बताया कानून पहले से मौजूद, अब सख्ती होगी
5 lakh fine for DJ: राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि डीजे और वाहन में लगे साउंड सिस्टम पर पहले से रोक है। नियमों के तहत, यदि कोई इसका उल्लंघन करता है तो एक लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल की कैद की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही दोहराया गया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत बार-बार नियम तोड़ने वालों पर वाहन जब्ती की कार्रवाई भी संभव है।
DJ संचालकों ने कहा एकतरफा कार्रवाई ना हो
Chhattisgarh DJ Penalty: सुनवाई के दौरान डीजे संचालकों की तरफ से भी हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका लगाई गई। उनका कहना था कि कई बार पुलिस बिना स्पष्ट नियमों के उनके खिलाफ कार्रवाई कर देती है। डीजे ऑपरेटरों ने मांग की कि कानून लागू करने से पहले साफ और पारदर्शी गाइडलाइन जारी होनी चाहिए, जिससे उन्हें भी अपनी बात रखने का मौका मिले। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार पहले ही अधिनियम लागू करने का आश्वासन दे चुकी है और अब किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तीन हफ्तों में सरकार को देनी होगी रिपोर्ट
सरकार ने अधिनियम लागू करने के लिए 6 हफ्तों का समय मांगा था, लेकिन हाईकोर्ट ने केवल 3 हफ्तों का वक्त देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 9 सितंबर तय की है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि त्योहारों के सीजन में डीजे और तेज आवाज पर नियंत्रण को लेकर सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।



