छत्तीसगढ़ में पहली बार ‘हाइड्रोपोनिक गांजा’ बरामद: बिना मिट्टी के उगाया गया हाईटेक नशा, पुलिस ने 2 तस्करों को दबोचा

छत्तीसगढ़ में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही जंग में एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। दुर्ग जिले की पुलिस ने पहली बार ‘हाइड्रोपोनिक गांजा’ (Hydroponic Weed) जब्त किया है। यह नशा अब तक प्रदेश में पकड़े गए सामान्य गांजे से कई गुना ज्यादा असरदार और महंगा बताया जा रहा है। पुलिस ने घेराबंदी कर दो ऐसे तस्करों को दबोचा है जो इस हाईटेक नशे को खपाने के लिए शहर में ग्राहक तलाश रहे थे। छत्तीसगढ़ के अपराध जगत में इस तरह की लैब आधारित खेती वाले नशे की एंट्री ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।

मुखबिर की सटीक सूचना पर कार्रवाई: भिलाई के रुआबांधा क्षेत्र में बिछाया गया जाल

दुर्ग पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बोरसी रोड स्थित बीज विकास निगम के पास कुछ युवक नशीले पदार्थों की सौदेबाजी करने वाले हैं। इस सूचना पर भिलाई नगर पुलिस की टीम ने इलाके में नाकेबंदी की और संदिग्धों पर नजर रखनी शुरू की। जैसे ही तस्कर वहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान भिलाई निवासी विक्रम साहू और यश विश्वकर्मा के रूप में हुई है। पुलिस अब इन दोनों से कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह की जड़ों तक पहुंचा जा सके।

बरामदगी में चौंकाने वाला खुलासा: सामान्य गांजे के साथ मिला ‘हाइड्रोपोनिक वीड’

तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से 2 किलो सामान्य गांजा मिला, लेकिन असली चौंकाने वाली बात 2.3 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजे की बरामदगी थी। यह प्रदेश का पहला ऐसा मामला है जिसमें इस तकनीक से तैयार नशा पकड़ा गया है। पुलिस ने मौके से चिलम और नशा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले रोलिंग पेपर भी बरामद किए हैं। भिलाई नगर थाने में आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

क्या है हाइड्रोपोनिक तकनीक? बिना मिट्टी और कम पानी में तैयार होता है जहर

हाइड्रोपोनिक तकनीक खेती का वह आधुनिक तरीका है जिसमें मिट्टी का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता। इसमें पौधों को केवल पानी और खास पोषक तत्वों (Nutrient Solution) के जरिए उगाया जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें फसल कम समय में तैयार हो जाती है और पैदावार भी काफी ज्यादा होती है। हालांकि, जब इस तकनीक का इस्तेमाल गांजा उगाने के लिए किया जाता है, तो वह सामान्य गांजे की तुलना में कहीं अधिक नशीला और घातक हो जाता है।

हाई टीएचसी का खतरा: सामान्य नशे से कहीं ज्यादा जानलेवा है यह ड्रग

विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोपोनिक तकनीक से तैयार गांजे में टीएचसी (Tetrahydrocannabinol) की मात्रा बहुत अधिक होती है। यही वह तत्व है जो इंसान के मस्तिष्क पर सीधा असर डालता है। सामान्य तौर पर खुले खेतों में उगने वाले गांजे की तुलना में लैब या नियंत्रित वातावरण में उगाया गया यह हाइड्रोपोनिक गांजा युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या दुर्ग-भिलाई के आसपास ही कहीं इसे उगाने के लिए कोई अवैध लैब तो नहीं चल रही है।

तस्करों के नेटवर्क पर पैनी नजर: पुलिस खंगाल रही है नशे का असली स्रोत

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का पूरा ध्यान इस सप्लाई चेन के मास्टरमाइंड तक पहुंचने पर है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भिलाई के इन युवकों तक यह हाईटेक नशा कहां से पहुंचा। क्या इसे दूसरे राज्यों से तस्करी कर लाया गया था या फिर स्थानीय स्तर पर ही इसकी खेती की जा रही थी। दुर्ग पुलिस ने साफ किया है कि नशे के इस नए ट्रेंड को रोकने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है जो सोशल मीडिया और संदिग्ध ठिकानों पर नजर रख रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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