
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में अब राजनीतिक हलचल और तेज़ हो गई है। शुक्रवार को ईडी की कार्रवाई के बाद गिरफ्तार किए गए चैतन्य बघेल से मिलने के लिए उनके पिता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दोपहर 1 बजे ईडी दफ्तर पहुंचेंगे। चैतन्य को कोर्ट ने पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
भूपेश बघेल ने खुद दी जानकारी
ED Office Raipur: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा:
“कल दोपहर 01:00 बजे बेटा चैतन्य से मिलने ED कार्यालय जाऊंगा।”
कैसे हुई गिरफ्तारी?
Bhupesh Baghel Son Arrest: ईडी की टीम ने शुक्रवार की सुबह करीब 6 बजे भिलाई स्थित भूपेश बघेल के घर पर छापा मारा। दो गाड़ियों में पहुंची करीब 8 अधिकारियों की टीम ने घंटों तलाशी ली। इसी दौरान उनके बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर लिया गया। खास बात यह रही कि गिरफ्तारी चैतन्य के जन्मदिन वाले दिन ही हुई।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें रायपुर स्थित विशेष न्यायाधीश डमरूधर चौहान की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन की ईडी रिमांड पर भेजा गया।
22 जुलाई को फिर होगी पेशी
ED Raid: ईडी अब चैतन्य बघेल से शराब घोटाले को लेकर लगातार पूछताछ कर रही है। रिमांड के बाद 22 जुलाई को शाम 4 बजे उन्हें दोबारा विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस पूछताछ से कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
22 जुलाई को करेंगे चक्काजाम और आर्थिक नाकेबंदी
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यवाही चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के खिलाफ 22 जुलाई को पूरे प्रदेश में चक्काजाम का ऐलान किया है।
क्या है शराब घोटाले का मामला?
Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला लंबे समय से सुर्खियों में है। आरोप है कि सरकार के संरक्षण में कई सौ करोड़ रुपये का घोटाला हुआ, जिसमें अफसरों और नेताओं की मिलीभगत बताई जा रही है। इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई चरणों में छापेमारी की है और अब इसने सीधे पूर्व सीएम के परिवार तक दस्तक दे दी है।
राजनीतिक तकरार भी तेज
ED Investigation: चैतन्य की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है। जहां कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं बीजेपी इसे कानून की कार्रवाई कह रही है।



