
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज एक ऐसी तस्वीर दिखी जो राज्य के बदलते हालातों की गवाही दे रही है। माओवादी विचारधारा को पीछे छोड़ चुके 120 पूर्व नक्सलियों ने सदन की कार्यवाही देखी। यह पहला मौका था जब इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पित नक्सली लोकतंत्र के इस सबसे बड़े मंदिर के साक्षी बने। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इन सभी का स्वागत किया और समाज की मुख्यधारा में लौटने के साहसी निर्णय के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
झीरम हमले के मास्टरमाइंड से लेकर इनामी कमांडर तक शामिल
सदन की दर्शक दीर्घा में बैठे इन लोगों में कुछ ऐसे नाम भी थे जो कभी बस्तर के जंगलों में खौफ का पर्याय माने जाते थे। इनमें 1 करोड़ रुपये का इनामी रूपेश और 25 लाख का इनामी चैतू शामिल है। चैतू को 2013 के झीरम घाटी हमले का मुख्य सूत्रधार माना जाता है। करीब 35 साल तक जंगलों में भटकने के बाद नवंबर 2025 में सरेंडर करने वाला चैतू आज टोपी पहने बेहद शांत भाव से विधायकों की बहस सुन रहा था।
डिप्टी सीएम के घर रेड कार्पेट पर हुआ भव्य स्वागत
विधानसभा आने से एक रात पहले इन 120 पूर्व नक्सलियों के लिए उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा के निवास पर विशेष कार्यक्रम रखा गया था। नवा रायपुर स्थित आवास पर उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया गया और फूलों की वर्षा कर स्वागत किया गया। डिप्टी सीएम ने प्रोटोकॉल किनारे रखकर इन सभी के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया। उन्होंने एक-एक व्यक्ति से बात की और उनसे शहर घूमने के अनुभवों के बारे में पूछा। यह रात्रिभोज सरकार और इन लोगों के बीच भरोसा जगाने की एक कोशिश थी।
सुरक्षा घेरे के बीच लोकतंत्र की शक्ति का अहसास
गुरुवार सुबह जब यह समूह विधानसभा पहुंचा तो सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। सघन जांच के बाद 66 पुरुषों और 54 महिलाओं को सदन के भीतर ले जाया गया। सामान्य सदस्यों ने जहां दर्शक दीर्घा में जगह ली, वहीं पूर्व सेंट्रल कमेटी के सदस्यों को अध्यक्षीय दीर्घा में बिठाया गया। पहली बार सदन की भव्यता और कार्यवाही को करीब से देखकर इन लोगों की आंखों में एक अलग चमक थी। यह दौरा उन्हें यह समझाने के लिए था कि बदलाव बंदूक से नहीं बल्कि संवाद और वोट की ताकत से आता है।
छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति की बड़ी सफलता
गृह मंत्री विजय शर्मा ने सदन में जानकारी दी कि अब तक प्रदेश में 2937 नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। सरकार की 2025 की नई पुनर्वास नीति के तहत इन लोगों को न केवल नकद इनाम दिया जा रहा है, बल्कि कौशल प्रशिक्षण, खेती के लिए जमीन, आवास और रोजगार की व्यवस्था भी की जा रही है। वर्तमान में सात पुनर्वास केंद्रों में 1700 से ज्यादा पूर्व नक्सली अपनी नई जिंदगी शुरू करने के लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं।
बस्तर में शांति बहाली की दिशा में ऐतिहासिक दिन
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस दिन को छत्तीसगढ़ के इतिहास का एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी संविधान को नहीं मानते थे, आज वे खुद संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। यह नजारा उन युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश है जो आज भी भटककर जंगलों में छिपे हुए हैं। सरकार का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में पहुंच जाएगा और विकास की नई इबारत लिखी जाएगी।



