Bijapur Naxal Encounter: बीजापुर मुठभेड़ में चार नक्सली ढेर, सभी के शव और हथियार बरामद

बीजापुर: Bijapur Naxal Encounter: बारिश के इस मौसम में एक बार फिर माओवादी वनांचल क्षेत्र में सक्रिय दिख रहे हैं। जैसे ही बारिश ने रफ्तार पकड़ी वैसे ही वनांचल क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। इसी बीच एक बार फिर जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। जिसमें सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। जवानों मुठभेड़ में 4 नक्सलियों को ढेर कर दिया है।

Bijapur Naxal News: मिली जानकारी के अनुसार, ये मुठभेड़ बीजापुर के जंगलों में हुई है। जिसमें ऑपरेशन मानसून के तहत जवानों ने 4 नक्सलियों को ढेर कर दिया है। सभी के शव भी बरामद कर ली गई है। साथ ही INSAS/SLR राइफल सहित कई अन्य हथियार भी जब्त कर ली गई है। इस खबर की पुष्टि पुलिस अधीक्षक डॉ जितेन्द्र यादव ने की पुष्टि है।

बस्तर में सक्रिय बड़े माओवादी दंपति ने किया सरेंडर

Bastar Naxali Surrender: आपको बता दें कि वनांचल क्षेत्र में लगातार माओवादियों को बड़ा झटका का सामना करना पड़ रहा है। लगातार जवानों के डर से अब नक्सली सरेंडर भी कर रहे हैं। मुठभेड़ के पहले आज नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है। जानकारी के अनुसार, बस्तर में सक्रिय वरिष्ठ माओवादी दंपतियों ने आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में डीजीपी हरीश गुप्ता के समक्ष आत्मसमर्पण किया है।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों में वरिष्ठ माओवादी जोरिगे नागराजू उर्फ कमलेश शामिल है। जिन्होंने 34 सालों से अधिक समय तक माओवादी पार्टी में काम किया है, उनकी पत्नी का नाम मेदका ज्योतिश्वरी उर्फ अरुणा है जो कि डिवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर) , नागराजू उर्फ कमलेश वर्तमान में पूर्वी बस्तर संभागीय समिति के प्रभारी के रूप में कार्यरत था, और दंडकारण्य विशेष जोनल समिति में स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (SZCM) के पद पर था। जिस पर छत्तीसगढ़ में 25 लाख और आंध्रप्रदेश में 20 लाख रुपये का ईनाम घोषित था। वही उनकी पत्नी अरुणा पर 5 लाख रुपये का ईनाम घोषित था। माओवादी पार्टी की विफलताओं और सेंट्रल कमेटी की नीतियों से निराश होकर इस दंपति ने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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