New Labor Code: ऐतिहासिक फैसला: चार नए लेबर कोड लागू, केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानून किये खत्म; गिग वर्कर्स और महिलाओं को मिलेगी सुरक्षा

केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए चार नए लेबर कोड को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की है। इन नए कोड्स के माध्यम से देश के 29 मौजूदा श्रम कानूनों को एकीकृत (Rationalize) और तर्कसंगत बनाया गया है। इन सुधारों का मुख्य लक्ष्य भारत के श्रम कल्याण ढांचे में सुधार लाना है, ताकि कार्यबल के सभी वर्गों के लिए, विशेषकर गिग वर्कर्स और महिला कर्मचारियों के लिए, व्यापक और समावेशी सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह बदलाव ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ के तहत किए गए हैं, जो नौ मौजूदा सामाजिक सुरक्षा कानूनों को एक ही ढाँचे में लाता है।

गिग वर्कर्स को पहली बार मिली पहचान और ‘यूआईडी’

नए नियमों के तहत, पहली बार गिग (Gig) और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी जा रही है। इन कर्मचारियों के कल्याण के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना की जाएगी। सभी असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को एक नेशनल पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद, प्रत्येक श्रमिक को एक विशिष्ट पहचान संख्या (UID) प्राप्त होगी, जो आधार द्वारा सत्यापित होगी और पूरे देश में मान्य रहेगी। इसके साथ ही, इन सभी श्रमिक वर्गों के लिए योजनाएं बनाने, निगरानी करने और सरकार को सलाह देने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना भी की जाएगी।

महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश और भत्ते में बड़े बदलाव

नए लेबर कोड में महिला कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार पेश किए गए हैं। अब वह महिला कर्मचारी, जिसने प्रसव से पहले 12 महीनों में कम से कम 80 दिन काम किया हो, वह अवकाश की अवधि के दौरान अपने औसत दैनिक वेतन के बराबर मातृत्व लाभ (मैटरनिटी बेनिफिट) पा सकती है। मातृत्व अवकाश की अधिकतम अवधि 26 हफ्ते निर्धारित की गई है, जिसमें से प्रसव से पहले अधिकतम दो महीने का अवकाश लिया जा सकता है। इसके अलावा, सरोगेसी का उपयोग करने वाली बायोलॉजिकल मदर और तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली माँ को भी तीन महीने का मातृत्व अवकाश मिलेगा।

क्रेच सुविधा और नर्सिंग ब्रेक के नियम सख्त किए गए

मातृत्व लाभ के साथ ही, कामकाजी माताओं के लिए सुविधाएँ बढ़ा दी गई हैं। अब डिलीवरी के बाद काम पर लौटी महिला कर्मचारी को बच्चे के 15 महीने का होने तक उसे दूध पिलाने के लिए प्रतिदिन दो नर्सिंग ब्रेक दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, 50 या इससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को अपने परिसर के निकट या निर्धारित दूरी के भीतर क्रेच (झूलाघर) सुविधा प्रदान करना अनिवार्य होगा। महिला कर्मचारी को क्रेच में प्रतिदिन चार बार जाने की अनुमति भी देनी होगी। यदि क्रेच की सुविधा नहीं मिलती है, तो कंपनी को अधिकतम दो बच्चों के लिए कम से कम 500 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह क्रेच भत्ता देना होगा।

वर्क फ्रॉम होम और मेडिकल बोनस का प्रावधान

नए नियमों के तहत, मातृत्व अवकाश के बाद काम पर लौटने वाली महिला कर्मचारी को यदि कार्य घर से किया जा सकने वाला हो, तो वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी जा सकती है। यह सुविधा नियोक्ता और कर्मचारी की आपसी सहमति पर निर्भर करेगी। इसके अलावा, यदि कंपनी की ओर से महिला कर्मचारी को प्रसव से पहले और बाद में निशुल्क देखभाल उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो 3,500 रुपये का मेडिकल बोनस दिया जाएगा। साथ ही, अब मातृत्व-संबंधी स्थितियों का प्रमाण (जैसे गर्भावस्था, प्रसव आदि) पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर, आशा कार्यकर्ता, या सहायक नर्स/दाई द्वारा जारी किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया सरल हो गई है।

Also Read: 8th Pay Commission Approved: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, मोदी कैबिनेट ने 8वें वेतन आयोग को दी मंजूरी

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button