
रायगढ़ पुलिस ने सरकारी नौकरी पाने के लिए धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। सक्ती जिले की एक महिला और एक युवक ने भारतीय डाक विभाग की भर्ती में फर्जी 10वीं की अंकसूची का सहारा लेकर डाकपाल (जीडीएस) की नौकरी हासिल कर ली थी। आरोपियों ने ऑनलाइन आवेदन के दौरान फर्जी दस्तावेज अपलोड किए थे, जिसके आधार पर उनका चयन रायगढ़ संभाग के बर्रा और सुलेसा शाखा में हो गया था। हालांकि, विभाग के सतर्क रुख ने इस जालसाजी को ज्यादा दिनों तक टिकने नहीं दिया।
तमिलनाडु बोर्ड की जांच में खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब डाक विभाग ने नियुक्त उम्मीदवारों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए संबंधित शिक्षा बोर्ड से संपर्क किया। चूंकि आरोपियों ने तमिलनाडु शिक्षा बोर्ड की 10वीं की अंकसूची पेश की थी, इसलिए विभाग ने जांच के लिए इसे वहां भेजा। तमिलनाडु बोर्ड ने स्पष्ट किया कि उनके रिकॉर्ड में ऐसी कोई अंकसूची जारी नहीं की गई है और पेश किए गए दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। बोर्ड की इस रिपोर्ट के बाद डाक विभाग ने तुरंत कोतवाली पुलिस को इसकी लिखित शिकायत की।
दलाल को दिए साढ़े तीन लाख रुपये
कोतवाली पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। पकड़े गए आरोपी नरेंद्र कुमार और सोनम साहू ने बताया कि उनकी मुलाकात कोरबा के रहने वाले विनोद कुमार राठौर से हुई थी। विनोद ने सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम मांगी थी। नरेंद्र कुमार ने नौकरी के बदले दलाल को 3.50 लाख रुपये नकद दिए थे, जबकि सोनम ने नियुक्ति के बाद पैसे देने का सौदा किया था। दलाल ने ही उन्हें तमिलनाडु बोर्ड की जाली मार्कशीट उपलब्ध कराई थी, जिसे आरोपियों ने जानते हुए भी असली बताकर इस्तेमाल किया।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी, मास्टरमाइंड फरार
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर पुलिस टीम ने सक्ती पहुंचकर आरोपी नरेंद्र कुमार और सोनम साहू को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उनके पास से फर्जी मार्कशीट और अन्य असली शैक्षणिक दस्तावेज भी जब्त कर लिए हैं। फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, इस पूरे खेल का मुख्य साजिशकर्ता और दलाल विनोद कुमार राठौर अभी फरार है। पुलिस की एक विशेष टीम कोरबा और संभावित ठिकानों पर उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।
योग्य उम्मीदवारों के हक पर डाका: एसएसपी
रायगढ़ एसएसपी ने इस कार्रवाई के बाद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है। फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेना न केवल एक गंभीर अपराध है, बल्कि यह उन मेहनती और योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन है जो अपनी योग्यता से नौकरी पाना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रायगढ़ पुलिस ऐसे धोखाधड़ी के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ यानी शून्य सहनशीलता की नीति अपनाएगी और किसी भी जालसाज को बख्शा नहीं जाएगा।
युवाओं के लिए जरूरी चेतावनी
प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि वे नौकरी के नाम पर सक्रिय दलालों और बिचौलियों के झांसे में न आएं। नौकरी दिलाने का दावा करने वाले लोग अक्सर फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेते हैं, जिसका परिणाम जेल की हवा खाना होता है। एसएसपी ने नागरिकों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति नौकरी लगवाने के नाम पर पैसों की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में दें। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी ताकि दलालों के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।



